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29 जून 2011

यूपीःखाली रह जाएंगी इंजीनियरिंग की 50 सीटें,फैकल्टी से कराया जा रहा छात्रों का जुगाड़

प्रदेश के साढ़े छह सौ इंजीनियरिंग कालेजों की आधी सीटें खाली रह जाएंगी। सूबे में पिछले सात दिनों तक इंजीनियरिंग की काउंसलिंग के लिए चले कागजात सत्यापन में 45 हजार छात्र-छात्राएं ही शरीक हुए। इसमें भी सभी काउंसलिंग के दौरान केन्द्रों पर आएंगे, इसको लेकर प्रवेश प्रक्रिया में लगे शिक्षकों को भी भरोसा नहीं है। गौरतलब है कि जुलाई के पहले हफ्ते से शुरू होने वाली कांउसलिंग में कागजातों का सत्यापन करा चुके छात्र-छात्राओं को ही शामिल किया जाएगा। ऐसे में इंजीनियरिंग की आधी सीटें ही भर सकेंगी। छात्रों की यह बेरुखी निजी क्षेत्र के कालेजों को भारी पड़ सकती है और कालेजों पर ताला लगाना पड़ सकता है। प्रदेश के मुख्य शहरों में चली सत्यापन प्रक्रिया में सभी श्रेणी के छात्रों के कागजातों का सत्यापान किया गया। इसके लिए छात्रों से पांच सौ रुपये शुल्क लिया गया। मंगलवार को सुबह तक 41 हजार छात्रों के कागजातों का सत्यापन हो चुका था। सोमवार को दस हजार छात्रों ने सत्यापन प्रक्रिया में हिस्सा लिया, लेकिन मंगलवार को यह रफ्तार सुस्त पड़ गयी। इसके मुश्किल से 45 हजार के पार होने की उम्मीद है। 22 से 28 जून तक चले कागजातों के सत्यापन में इंजीनियरिंग, एमबीए तथा एमसीए सहित सभी पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया का पहला चरण पूरा किया गया। सभी पाठ्यक्रमों को मिलाकर 650 इंजीनियरिंग कालेजों में एक लाख 20 हजार सीटें हैं। इनमें 82 हजार से ज्यादा सीटों को काउंसलिंग के जरिये भरा जाना है। इन सीटों को भरने के लिए सात दिनों तक चली सत्यापन प्रक्रिया में 45 हजार से ज्यादा छात्र शामिल हुए। इन सभी के प्रवेश लेने के बाद भी 37 हजार से ज्यादा सीटें खाली रह जाएंगी। इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के एक प्रोफेसर का कहना है कि यही नौबत रही तो इंजीनियरिंग कालेजों में ताला लग जाएगा। छात्रों की इस बेरुखी की वजह पर उनका कहना है कि जब हर तीन किमी. पर इंजीनियरिंग कालेज खुलेगा तो फिर दाखिलों की यह स्थिति होगी ही। काउंसलिंग में शामिल होने वाले छात्रों को पूरा जोर एक दर्जन सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों तथा 20 से ज्यादा निजी क्षेत्र के कालेजों में रहेगा। सूत्रों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व इसी तरह फाम्रेसी के संस्थान थोक के भाव खुले थे, लेकिन कुछ समय बाद कई बंद हो गये।

राजधानी सहित प्रदेश के कई हिस्सों में खुले इंजीनियरिंग कालेजों ने छात्रों का दाखिला लेने के लिए जुगाड़ शुरू कर दिया है। इन संस्थानों ने छात्रों को लाने के लिए अपनी- अपनी फैकल्टी को लगा दिया है। आईईटी के बाहर काउंसलिंग के दौरान लगने वाली संस्थानों की स्टालों पर भी फैकल्टी यही काम करते देखे जा सकेंगे। सीतापुर रोड स्थित एक संस्थान की फैकल्टी सुप्रिया (बदला नाम) ने बताया कि उन्हें पांच छात्रों के प्रवेश की जिम्मेदारी दी गयी है। संस्थान में बने रहने के लिए वह छात्रों को मैनेज करने में लगी हैं। आईईटी के एक वरिष्ठ शिक्षक ने कहा कि कई संस्थानों ने काउंसलिंग शुरू होने से पहले ही दाखिले शुरू कर दिये हैं। वे छात्रों का प्रवेश लेने की बजाय उनका पंजीकरण करा ले रहे हैं। मनमाफिक ब्रांच देने के नाम पर इन छात्रों से 50-50 हजार रुपये की मोटी रकम जमा करायी जा रही है। यही हाल फैजाबाद रोड स्थित इंजीनियरिंग कालेजों का भी है। हाईप्रोफाइल इंजीनियरिंग कालेजों में शामिल संस्थान अभी वेट एण्ड वाच की रणनीति पर चल रहे हैं(राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,29.6.11)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. जिन कालेजों में फैकल्टी के नाम पर मजदूर पढ़ा रहे हैं उनमें ताला ही लगना है.

    ड्रामा द ग्रेट डिक्टेटर्स

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  2. बहुत बेच ली शिक्षा अब मुर्गियाँ पाल लेंगे इन भवनों मे इनके मालिक

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