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28 जून 2011

फॉरेंसिक साइंस में करिअर और दाखिला

आतंकवादी घटनाओं में इजाफे को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि देश व विदेश में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इस लिहाज से इस विषय के जानकारों का भविष्य काफी उज्ज्वल है। अगर आप भी बतौर फॉरेसिंक एक्सपर्ट खुद को स्थापित करना चाहते हैं तो डीयू के कई कॉलेजों से इस विषय की पढ़ाई कर सकते हैं। एक रिपोर्टः

एसजीटीबीखालसा कॉलेज में आवेदन जारी, आखिरी तिथि 30 जुलाई
देश में घटने वाली आतंकी घटनाएं हों या आपराधिक वारदातें, इनके सूत्रधारों की धर पकड़ के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की जरूरत पर काफी जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा बलों का विशेष प्रशिक्षण आज समाज और समय की मांग है। प्रशिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण पहलू फॉरेंसिक साइंस से जुड़ा है। इस साइंस का जानकार व्यक्ति आतंकवादी वारदात या अपराध से जुड़े लोगों को पकड़वाने में खासा मददगार होता है। आतंकवादियों या अपराधियों का स्केच तैयार करने में भी फॉरेंसिक साइंस के एक्सपर्ट ही मददगार होते हैं। अदालत भी कानून में इसी साइंस की मदद लेकर जांच को आगे बढ़ाती है। आशय यह कि आतंकी वारदातों की गुत्थियां हों या किसी की रहस्यात्मक मौत, इसे सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस खासी मददगार है। यह वारदात या घटना-स्थल से प्राप्त साक्ष्यों का मुआयना और परीक्षण करती है। फॉरेंसिक साइंटिस्ट से प्राप्त इनपुट को लेकर ही इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर अदालत के समक्ष हाजिर होता है। जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक साइंटिस्ट घटना-स्थल का भी निरीक्षण करता है, ताकि साक्ष्यों का पता लगाया जा सके।

कोर्स की रूपरेखा
फॉरेंसिक साइंस को लेकर आज तीन तरह के कोर्स चल रहे हैं। पहला सर्टिफिकेट कोर्स है। इसमें फॉरेंसिक के विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रारंभिक स्तर का ज्ञान दिया जाता है। उसके बारे में रुचि और समझ पैदा की जाती है। इसमें साइंस के विभिन्न रूपों मसलन भौतिकी, केमिस्ट्री, टॉक्सिकोलॉजी, जूलॉजी, एंथोपोलॉजी, बॉटनी, मनोविज्ञान और मेडिसिन आदि के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा छात्रों को फोटोग्राफी व हैंड राइटिंग परीक्षण के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है। थियोरॉटिकल के साथ उन्हें प्रैक्टिकल भाग के बारे में बताया जाता है। वे क्रिमिनल लॉ और दूसरे डिग्री कोर्स यानी बीएससी स्तर के तीन वर्षीय कोर्स में, सर्टिफिकेट, क्रिमिनोलॉजी के बारे में भी कुछ जानकारी हासिल करते हैं। डिप्लोमा में जो पढ़ाया जाता है, उसका विस्तार होता है। इसके लिए कोर्स को छह सेमेस्टर में बांटा जाता है। सभी सेमेस्टर में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल शामिल होता है। इसके अलावा छात्र डिग्री लेवल पर दो सबसीडरी विषय जैसे केमिस्ट्री, भौतिकी, मैथ या बॉयोलॉजी पढ़ते हैं।

दाखिले की प्रक्रिया
विश्वविद्यालय में इस कोर्स में दाखिला 12वीं की मेरिट के आधार पर मिलता है। छात्रों का साइंस पढ़ा होना जरूरी है। दिल्ली विश्वविद्यालय के एंथोपोलॉजी विभाग में चल रहे सर्टिफिकेट कोर्स में जुलाई माह में आवेदन मंगाए जाएंगे। खालसा कॉलेज में आवेदन की प्रक्रिया जारी है। यहां पीजी डिप्लोमा कोर्स है जिसमें बीएससी के छात्रों को मेरिट के मुताबिक दाखिला मिलेगा।


आवेदन की आखिरी तिथि 30 जुलाई है। 

नौकरी कहां-कहां
इस विषय के छात्र फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में अलग-अलग रूपों में काम करते हैं। ग्रेजुएशन वाले लेबोरेटरी अटेंडेंट, पोस्ट ग्रेजुएशन वाले जूनियर लेबोरेटरी सहायक और पीचएडी तक पढ़ाई करने वाले साइंटिफिक ऑफिसर व सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर बनते हैं। इसके तहत कोई कोर्स करके चाहे तो स्टेट या सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में लैब अटेंडेंट के रूप में ज्वाइन कर सकता है और फिर अनुभव में बढ़ोत्तरी के साथ सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर या सहायक निदेशक लेवल का काम कर सकता है। निजी डिटेक्टिव एजेंसी में इनकी भूमिका बढ़ गई है। एनालिटिकल लैब में इनकी खासी मांग है। इनके अलावा कॉलेज व विश्वविद्यालय में अध्ययन- अध्यापन का रास्ता खुला है। इससे जुड़े प्रोजेक्ट भी लेकर काम कर सकते हैं। डायरेक्टेरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस यह मौका देता है। अदालतों में फिंगर एक्सपर्ट या हैंडराइटिंग एक्सपर्ट के रूप में काम कर सकते हैं। पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में इनकी जरूरत होती है। 

इस कोर्स के छात्र इन संस्थानों में नौकरी के अवसर तलाश सकते हैं।

सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, फिंगर प्रिंट ब्यूरो, कैबिनेट सेक्रेटेरियट, सीबीआई, आईबी, फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी, एगमार्क लेबोरेटरी, केमिकल एग्जामिनर लेबोरेटरी, सेरोलॉजिकल लेबोरेटरी, बैंक, लॉ इंफोर्समेंट विभाग, यूनिवर्सिटी व कॉलेज में अध्यापन, पुलिस, मिलिटरी इंटेलिजेंस, प्राइवेट डिटेक्टिव में नौकरी के अवसर उपलब्ध होते हैं।

कोर्स कराने वाले अन्य संस्थान
बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा, पीजी कोर्स
एमिटी यूनिवर्सिटी, यूजी, पीजी व डिप्लोमा कोर्स 
आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली, पीजी कोर्स 

फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिक
ये विषय फॉरेंसिक साइंस और मनोविज्ञान को मिला कर बनाया गया है। फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट से अक्सर जज या वकील सलाह लेते हैं, ताकि वे क्रिमिनल का व्यवहार समझ कर उसे सही सजा सुना सकें। कई बार मृत्यु की सजा से लेकर उमर कैद तक की सजा में फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिक की सहायता से निर्णय लिया जाता है। कई बार इस विषय के जानकार पुलिस कर्मियों और वकीलों को ट्रेनिंग भी देते हैं, जिससे किसी केस को सुलझाते समय वे बारीकियों का ध्यान रख सकें।
(प्रियंका कुमारी,हिंदुस्तान,दिल्ली,28.6.11)

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