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21 जून 2011

महाराष्ट्रःपाठ्यक्रम से फोरेंसिक मेडिसिन हटाने पर नोटिस

वैद्यकीय पाठ्यक्रम से फोरेंसिक मेडिसिन विषय हटाने के विरुद्घ दायर जनहित याचिका पर नागपुर हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार तथा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी व पी. डी. कोदे की संयुक्तपीठ ने उक्त नोटिस जारी कर उपरोक्त प्रतिवादियों से याचिका के संबंध में 25 जुलाई तक जवाब मांगा है।

यह जनहित याचिका समाजसेवी अनिल वडपल्लीवार तथा 3 प्रशिक्षु डाक्टरों ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने देशभर में वैद्यकीय पाठ्यक्रम से फोरेंसिक मेडिसिन विषय को हटाने के मेडिकल काउंसिल के निर्णय को चुनौती दी है।

याचिका के अनुसार इस शैक्षणिक सत्र से मेडिकल काउंसिल स्नातक तक के पाठ्यक्रमों में से फोरेंसिक मेडिसिन विषय हटाने वाली है। इसका विपरीत परिणाम छात्रों पर तो पड़ेगा ही, फौजदारी न्याय प्रकरणों की सुनवाई पर ही असर होगा।

फोरेंसिक मेडिसिन विभाग द्वारा दी गई रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि वैद्यकीय पाठ्यक्रम से उक्त विषय हटाया गया तो आपराधिक मामलों के आरोपी अत्यंत सरलता से प्रकरणों से रिहा हो जाएंगे।


वर्ष 2008 की तुलना में वर्ष 2009 में अपराधों की संख्या में 3.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। प्रति वर्ष अपराधों की संख्या में लगातार बढ़त हो रही है, अत: उक्त विषय को पाठ्यक्रम से नहीं हटाया जाना चाहिए। 

याचिकाकर्ता ने बताया है मेडिकल काउंसिल ने 15 मई 2010 को एक अधिसूचना जारी कर बोर्ड ऑफ गवर्नस का गठन किया था। इस बोर्ड की सिफारिश पर मेडिकल काउंसिल उक्त विषय हटा रही है। 

याचिकाकर्ता ने मेडिकल काउंसिल के उक्त निर्णय को रद्द करने तथा याचिका की सुनवाई पूर्ण होने तक उक्त निर्णय पर रोक लगाने का आग्रह अदालत से किया है(दैनिक भास्कर,नागपुर,21.6.11)।

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