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17 जून 2011

पंजाबी मेधावियों की पसंद सेना नहीं

भारतीय सेना में मेधावी छात्राएं शामिल हों, इसके लिए देश को अभी कुछ और इंतजार करना होगा। भारतीय सेना के तीनों अंगों में शामिल होना अभी भी मेधावी छात्राओं की पसंद नहीं है। छात्राएं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में काम करना तो चाहतीं लेकिन सेना में जाने से वो अभी भी कतराती हैं।

दैनिक भास्कर ने दसवीं और 12 वीं कक्षा में जिले में टॉप करने वाली छात्राओं से सेना में शामिल होने के बारे में पूछा तो किसी ने भी हामी नहीं भरी। लड़कियां अभी भी सेना में जाने से डरती हैं और वह डर उनके मन से निकल भी नहीं रहा है। सेना के पूर्व अफसर इसके लिए शिक्षा प्रणाली और मल्टीनेशनल कंपनियों के लोक लुभावने सैलरी पैकेजों को जिम्मेदार मानते हैं। लड़कियों व अभिभावकों को जागरूक करने की जरूरत है।

राज्य सरकार की तरफ से युवाओं को सेना में आने के लिए प्रेरित करने के लिए नियुक्ति रिटायर्ड ब्रिगेडियर जी जे सिंह का कहना है कि लड़कियों को स्कूली स्तर पर सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित नहीं किया जाता है। उन्होंने बताया कि अभी तरनतारन और मानसा जिले से 225 के करीब लड़कियों को सेना के विभिन्न विभागों में भेजा है। उन्होंने मेधावी छात्राओं से अपील की है कि वो करियर के लिए सेना को जरूर चुने ताकि सेना को इंटेलीजेंट अफसर मिलते रहें।

टॉपर्स का कहना है

शिवांगी सूद: बारहवीं कक्षा की ऑटर्स स्ट्रीम में सीबीएसई स्कूलों में शहर में पहले स्थान पर रही। शिवांगी आईपीएस बनकर समाज सेवा करना चाहती है लेकिन सेना में शामिल नहीं होना चाहती।
नीलिता: बारहवीं कक्षा की मेडिकल स्ट्रीम में सीबीएसई स्कूलों में शहर में प्रथम। सेना में जाना नहीं चाहती।
संजना: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा में जिले की टॉपर। प्रोफेसर बनेगी लेकिन सेना में नहीं जाना चाहती।
मुस्कान: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा में जिले की टॉपर। सेना में नहीं जाना चाहती।
अमृत कौर: दसवीं कक्षा में जिले में दूसरे स्थान पर। सेना में नहीं जाना चाहती।

थल सेना में संभावनाएं
कम्युनिकेशन, मेडिकल, नर्सिग ऑफिसर, लॉ ब्रांच में, आर्मी सप्लाई कोर

जल सेना में संभावनाएं
टेक्निकल सर्विसेज, एजुकेशनल कोर

वायु सेना में संभावनाएं
पायलट, डोमेस्टिक ब्रांच, टेक्निकल ब्रांच व इंजीनियरिंग ब्रांच में अच्छे अवसर हैं(दैनिक भास्कर,लुधियाना,17.6.11)।

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