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16 जुलाई 2011

बिहारःकोचिंग संस्थानों की होगी जांच

सरकारी कानून का उल्लंघन कर अभिभावकों और छात्रों से रुपये ऐंठ रहे कोचिंग संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने शुक्रवार को जनता दरबार में एक फरियादी की शिकायत सुनने के बाद पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारी को यह निर्देश दिया। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को कहा कि जांच और कार्रवाई के पहले एक नोटिस के माध्यम से सरकार द्वारा कोचिंग संचालन के लिए किये गये प्रावधानों से उन्हें अवगत कराये। इसके बाद एक अभियान चलाकर सरकार के प्रावधानों को नहीं मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पटना में करीब दो हजार कोचिंग संचालकों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, लेकिन उनके द्वारा लगातार नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत विभाग को मिल रही है। अभिभावकों को वे न तो प्रोस्पेक्टस उपलब्ध कराते हैं और उन ही फीस तथा कोर्स की लिखित जानकारी देते हैं। इस कारण छात्र-अभिभावक उलझन में रहते हैं। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी से इसकी समीक्षा करने की बात कही। इसके पहले दरबार में आये युवक ने बताया कि पटना के मुसल्लहपुर स्थित एक कोचिंग संचालक ने नामांकन लेने के बाद उसे कोचिंग से निकाल दिया है और विरोध करने पर लड़की से छेड़खानी का आरोप लगाकर फंसाने का आरोप लगाने का भय दिखाता है। प्रधान सचिव ने एक अन्य फरियादी की गुहार सुनने के बाद बताया कि अनुदानित स्कूल- कॉलेजों में शिक्षकों के बीच वित्तीय राशि के वितरण में शिकायत होने पर सरकार उनके अनुदान राशि पर रोक लगायेगी। इसके पहले शिकायतकर्ता के आरोप पर विभाग के अधिकारियों द्वारा इसकी विधिवत जांच करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि इस बाबत लगातार शिकायतें आ रही हैं और इसी को लेकर ट्रिब्यूनल बनाने के विधेयक को महामहिम के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार को अनुदान देने से मतलब है। प्रधान सचिव ने अपने दरबार में आये फरियादियों की गुहार पर हुई प्रगति रिपोर्ट मंगाने का भी निर्देश दिया। कटिहार से आयी एक छात्रा ने शिकायत की कि सौरिया स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय में पठन-पाठन के साथ-साथ खाने-पीने की व्यवस्था भी खराब हो गयी है। यह स्थिति तब से हुई है जब से इसके संचालन का कार्य एक एनजीओ को दिया गया है। प्रधान सचिव ने फौरन इसकी जांच करने का निर्देश कटिहार के डीईओ को दिया। दरबार में आये एक शिक्षक ने शिकायत की कि उसे उर्दू विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है जबकि वह उर्दू जानता तक नहीं है(राष्ट्रीय सहारा,पटना,16.7.11)।

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