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06 जुलाई 2011

उत्तराखंडःसरकारी स्कूलों पर कसा शिंकजा

सरकारी स्कूलों की दिशा व दशा को सुधारने को लेकर शासन गंभीर हो गया है। शासन के निर्देश पर स्कूलों की वास्तविक हकीकत जानने के लिए 11 बिन्दुओं पर गहन जांच-पड़ताल की जा रही है। जांच का जिम्मा खण्ड शिक्षा अधिकारी से लेकर अपर निदेशक तक के अधिकारियों को सौंपा गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सत्र हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद स्कूलों में किताबों के साथ-साथ शिक्षकों के न मिलने की शिकायतें मिल रही थी। इसके अलावा पूर्व में कई मर्तबा छात्रों का फर्जी पंजीकरण करने का मामले भी उजागर हुए हैं। इन तमाम मुद्दों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग में तीन निदेशालय बनने के बाद गहनता से जांच करने का निर्णय लिया गया है, ताकि स्कूलों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके। इसके लिए प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्कूलों की जांच का कार्य शुरू हो चुका है। जांच में मुख्य रूप से छात्रों की संख्या व शिक्षकों की उपस्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है। स्कूलों में पंजीकृत संख्या की अपेक्षा बच्चों की उपस्थिति, स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों की उपस्थिति का औसत क्या रहा जैसे मुद्दे जांच में शामिल हैं। साथ ही मिड-डे मिल व किताबों, स्कूल में बिजली, पानी, कम्प्यूटर, विद्यालय भवन आदि के स्थिति की जानकारी ली जाएगी। साथ ही स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का शैक्षिक स्तर एवं रमसा के तहत उच्चीकृत स्कूलों की स्थिति का आंकलन भी किया जाएगा। जांच के काम खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर निदेशालय के उच्चाधिकारियों को लगाया है। प्रत्येक अधिकारी को कम से कम आठ दुर्गम व 10 सुगम क्षेत्रों में स्थित स्कूलों की जांच करने का निर्देश दिया गया। जांच की कार्रवाई को सही ढंग से अंजाम देने के लिए उच्चाधिकारियों को जनपद भी सौंपे गये है। शिक्षा निदेशक सीएस ग्वाल ने बताया कि अधिकारियों को जांच रिपोर्ट 15 जुलाई तक सौंपने को कहा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों की स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाये जाएंगे(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,6.7.11)।

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