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01 जुलाई 2011

डीयूःकोटे के दाखिले के लिए सुप्रीम कोर्ट जा सकता है केंद्र

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में दाखिले के लिए अधिक कट ऑफ अंकों के चलते पिछड़े वर्ग के छात्रों पर आए संकट से केंद्र सरकार के भी माथे पर पसीना आने लगा है। स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर वह अब इन दिक्कतों से निजात पाने के उपाय ढूंढ़ने में जुट गई है। मकसद किसी भी सूरत में दाखिले के लिए बढ़ते कट ऑफ की बीमारी को रोकना है। इसीलिए वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाने की सोच रही है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने गुरुवार को यहां सरकार की इस मंशा का खुलासा किया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कॉलेजों में दाखिले की मौजूदा व्यवस्था सभी को आसानी से शिक्षा उपलब्ध कराने की नीति के खिलाफ है। दाखिले के लिए अंकों का बढ़ता कट ऑफ पिछड़ों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के पीछे के उद्देश्य को नुकसान पहुंचा रहा है। उससे निजात पाने के लिए सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिनमें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना भी शामिल है। लेकिन इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस समस्या के समाधान के लिए एक दाखिला परीक्षा भी विकल्प बन सकता है। सरकार का 2013 तक ऐसा करने का विचार है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़े वर्ग के छात्रों के मामले में सामान्य दाखिलों के लिए अंकों के तय कट ऑफ से दस प्रतिशत कम अंकों पर दाखिले का आदेश दिया था। मंशा इस वर्ग के कोटे की सीटों को भरना था। फिर भी दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों के दाखिले में यह कट ऑफ इतना अधिक है कि पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए वहां तक पहंुचना आसान नहीं है। सिब्बल ने कहा कि इस बारे में वे दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से फिर से बात करेंगे। यह पूछे जाने पर कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पिछड़े वर्ग के कोटे में दाखिले के लिए हुए रैकेट के खुलासे को सरकार किस रूप में लेती है? मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि सरकार इससे चिंतित है, इसीलिए उसके हल का प्रयास कर रही है। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में अंकों का कट ऑफ बहुत अधिक होने के चलते छात्रों के सामने दाखिले का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसी बीच सवर्ण वर्ग के छात्रों को फर्जी पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिला दिलाने के रैकेट का हाल में पर्दाफाश हुआ है(दैनिक जागरण,दिल्ली,1.7.11)।

राष्ट्रीय सहारा की रिपोर्टः
दिल्ली विविद्यालय के कालेजों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए आरक्षित सीटों पर दाखिले के लिए अधिक कटऑफ अंक पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह इस विषय का समाधान निकालने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना शामिल है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा ‘वर्तमान शिक्षा पण्राली शिक्षा तक सुगम पहुंच की नीति के खिलाफ है।’ उन्होंने कहा कि इस प्रकार की समस्याओं को समाप्त करने के लिए छात्रों के लिए एकल परीक्षा आयोजित करना विकल्प हो सकता है। वह अधिक कटऑफ के विषय पर दिल्ली विविद्यालय के कुलपति से बात करेंगे। एक अन्य विकल्प यह भी हो सकता है कि ओबीसी छात्रों के हित को देखते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाए। सिब्बल ने समारोह से इतर कहा ‘यह ऐसा विषय है जिस पर मैं उच्चतम न्यायालय में जाने के बारे में सोच रहा हूं । ओबीसी छात्रों के लिए 10 प्रतिशत के अंतर का जो प्रावधान आपने रखा है, वह वास्तव में डीयू में दाखिले की इस वर्ग के छात्रों की आकांक्षा को पूरा नहीं करता है। लेकिन अभी मैंने इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं किया है।’ ओबीसी आरक्षण के तहत उच्चतम न्यायालय ने इस वर्ग के छात्रों को अधिकतम 10 प्रतिशत छूट देने का आदेश दिया था ताकि सीटों को भरा जा सके। सिब्बल का सपना है कि वे साल 2013 तक देशव्यापी एकल प्रवेश परीक्षा को हकीकत बनते देख सकें। सिब्बल ने कहा ‘यह मेरा उद्देश्य, इच्छा और सपना है।’ आईआईटी दिल्ली के एससी, एसटी छात्रों के व्यक्तित्व निखारने से संबंधित कदम को कुछ लोगों के भेदभावपूर्ण बताए जाने के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा कि संस्थान ने इसे वेबसाइट से हटा लिया है।

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