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22 अगस्त 2011

यूपी के 14274 स्कूलों में कोई विज्ञान शिक्षक नहीं

प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित उच्च प्राथमिक स्कूल विज्ञान शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। हकीकत यह है कि सूबे के 46 हजार में से 14,274 परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान शिक्षक नहीं हैं। इन स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई जुगाड़ से चल रही है। विज्ञान शिक्षकों की कमी से जूझ रहे बेसिक शिक्षा विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए 80 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में विज्ञान व कला वर्ग के शिक्षकों का चयन 60:40 के अनुपात में करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। प्रदेश के 46 हजार परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में से 31,726 विद्यालयों में ही विज्ञान के शिक्षक उपलब्ध हैं। शेष 14,274 यानी 31 प्रतिशत उच्च प्राथमिक स्कूल विज्ञान शिक्षकों के बिना संचालित किये जा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब शासन परिषदीय स्कूलों में विज्ञान और गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कई बार दे चुका है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश चंद्र कनौजिया का कहना है कि विज्ञान शिक्षकों की कमी उन जिलों में ज्यादा है, जहां पहले से ही शिक्षकों की कमी है। उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान शिक्षकों की कमी इस वजह से भी है, क्योंकि प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत विज्ञान शिक्षकों में से अभी कुछ की प्रोन्नति उच्च प्राथमिक स्कूलों के सहायक अध्यापक पद पर नहीं हो पायी है। विज्ञान शिक्षकों की कमी से निपटने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने शासन को एक नया प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 80 हजार रिक्त पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में पुरुष और महिला, दोनों ही वर्गों में विज्ञान और कला वर्ग के शिक्षकों का चयन 60:40 के अनुपात में किया जाए। गौरतलब है कि शिक्षकों के 80 हजार खाली पदों में से 50 प्रतिशत पद पुरुष और इतने ही महिला अभ्यर्थियों से भरे जाने हैं। इस हिसाब से पुरुष वर्ग के 40 हजार में से 24 हजार पदों और महिला वर्ग के भी इतने ही पदों पर विज्ञान शिक्षकों का चयन करने की मंशा है। कुल मिलाकर 80 हजार पदों में से 48 हजार पदों पर विज्ञान शिक्षकों को भर्ती करने का इरादा जताया है। फिलहाल विज्ञान शिक्षकों की कमी से निपटने के लिए सचिव बेसिक शिक्षा अनिल संत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन स्थानों पर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में हों, वहां प्राथमिक विद्यालय के विज्ञान शिक्षक की सहायता से उच्च प्राथमिक स्कूल में विज्ञान की अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित की जा सकती हैं(राजीव दीक्षित,दैनिक जागरण,लखनऊ,22.8.11)।

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