मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

09 अगस्त 2011

यूपीःकहीं भारी न पड़ जाए टीईटी को लेकर चुप्पी

शिक्षा के अधिकार के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर शासन की चुप्पी स्तब्धकारी है। टीईटी पर शासन की खामोशी यदि बरकरार रही तो यह प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में बीएड डिग्रीधारकों को शिक्षक नियुक्त करने की कवायद पर ग्रहण लगा सकती है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी को स्क्रीनिंग टेस्ट के तौर पर उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। एनसीटीई ने टीईटी का प्रारूप निर्धारित करते हुए बीती 11 फरवरी को राज्यों को इसे जारी भी कर दिया, ताकि वे इसके आधार पर अपने यहां टीईटी आयोजित कर सकें। एनसीटीई द्वारा निर्धारित प्रारूप के आधार पर प्रदेश में टीईटी आयोजित करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने शासन को टीईटी का प्रस्ताव भेजा था। इस बीच शासन स्तर पर हुए विचार विमर्श में टीईटी के आयोजन की जिम्मेदारी उप्र बोर्ड को सौंपने पर सहमति बनी। यह सहमति बनने के बाद सचिव बेसिक शिक्षा ने बीती मई में सचिव माध्यमिक शिक्षाको पत्र लिखकर टीईटी के आयोजन के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की सहमति मांगी थी। उन्होंने यह भी पूछा था कि टीईटी को आयोजित कराने के लिए क्या माध्यमिक शिक्षा विभाग इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 में वांछित संशोधन कराएगा। इस बारे में बेसिक शिक्षा विभाग को अब तक माध्यमिक शिक्षा विभाग का जवाब नहीं मिला है। इस वजह से टीईटी के आयोजन को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। राज्य के परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की जबरदस्त कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने एनसीटीई से बीएड डिग्रीधारकों को भी शिक्षक नियुक्त करने की छूट देने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार के अनुरोध को मानते हुए एनसीटीई ने न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीए/बीएससी/बीकॉम और बीएड करने वालों को पहली जनवरी 2012 तक प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक नियुक्त करने की अनुमति दे दी बशर्ते कि ऐसे अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त छह माह का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर लें। एनसीटीई की अधिसूचना के क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 80 हजार रिक्त पदों पर बीएड डिग्रीधारकों की नियुक्ति का प्रस्ताव कैबिनेट के अनुमोदन के लिए भेज दिया है। प्राथमिक शिक्षक के पद पर नियुक्त होने के लिए बीएड डिग्रीधारकों को टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी है, लेकिन प्रदेश में टीईटी के आयोजन के बारे में अब तक अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। वहीं, दूसरी ओर बीएड डिग्रीधारको को शिक्षक नियुक्त करने के लिए अब सिर्फ पौने पांच महीने की मोहलत बची है। जानकारों का कहना है कि यदि टीईटी के आयोजन में लेटलतीफी के कारण सरकार बीएड डिग्रीधारकों को शिक्षक नियुक्त करने का मौका चूक जाती है तो यह राज्य में शिक्षा के अधिकार को सबसे करारा झटका होगा(दैनिक जागरण,लखनऊ,9.8.11)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।