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05 अगस्त 2011

यूपीःआश्रम पद्धति से शिक्षा पर लगा ग्रहण

बालगृह के बेसहारा बच्चों को आश्रम पद्धति से शिक्षा दी जानी थी, लेकिन उनकी पढ़ाई पर ग्रहण लग गया। वजह दो हैं। पहला, विद्यालय तक जाने का साधन न होना और दूसरा, छात्राओं की सुरक्षा का भय। फिलहाल समाज कल्याण विभाग की एक योजना अधर में लटकती नजर आ रही है। इसका समाधान तलाशने की बजाए संबंधित अधिकारी एक दूसरे पर आरोप मढ़ने में जुट गए हैं। यह मामला है प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बालगृह शिशु और मोतीनगर स्थित राजकीय बालगृह बालिका के बच्चों को मोहान रोड स्थित राजकीय आश्रम पद्धति इंटर कॉलेज में प्रवेश दिलाए जाने का। राजकीय आश्रम पद्धति इंटर कॉलेज में न जा पाने की सूरत में राजकीय बालगृह बालिका की 28 बालिकाओं को मोतीनगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में दाखिला दिला दिया गया है। वहीं राजकीय बालगृह शिशु की सात बच्चियों के लिए संस्थान की तलाश जारी है। आखिर इसकी नौबत आई ही क्यूं? क्या बालगृह को यह नहीं मालूम था कि आश्रम से संस्थान तक की दूरी कितनी है और अगर असुविधा होगी तो इससे कैसे निपटा जाएगा? इस बाबत अगर जिला प्रोबेशन अधिकारी विजय विक्रम सिंह की मानें तो बालगृह को इसकी जानकारी नहीं थी। वह कहते हैं कि हम तो ये जानते थे बच्चों को हॉस्टल मिलेगा और आने-जाने में असुविधा नहीं होगी। केवल छुट्टियों के दिनों में आना जाना होगा। इसलिए वहां दाखिला दिलाया गया लेकिन प्रवेश के बाद मालूम चला कि उनको हास्टल नहीं मिलेगा। नतीजतन दूसरा संस्थान तलाशा गया। वहीं निदेशक समाज कल्याण मिश्री लाल पासवान डीपीओ के इस बयान पर एतराज जताते हैं। साथ ही ऐसी अनभिज्ञता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं। वह कहते हैं कि विभाग द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक इस बात का निर्णय हो चुका था कि आश्रम पद्धति विद्यालयों में पांच सीटें बढ़ाई गई हैं। उन्हें छात्रावास की सुविधा नहीं दी जाएगी। इस बात की जानकारी से उन्हें अवगत भी कराया गया था। लिहाजा इस बात की गुंजाइश नहीं रहती कि उनको जानकारी नहीं थी(दैनिक जागरण,लखनऊ,5.8.11)।

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