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19 अगस्त 2011

सेना के जवानों को मिलेगा ज्यादा राशन

सैनिकों की कठोर तथा शारीरिक रूप से तनावों से भरी जिंदगी को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने जवानों को अधिक पौष्टिक आहार देने और उनके राशन की मात्रा बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत बढ़िया किस्म का राशन उपलब्ध कराने और आहार में नए उत्पादों को शामिल करने के निरंतर प्रयासों के तहत कई कदम उठाए गए हैं।

राशन में सुधार और नई सामग्रियों को जोड़ने के बारे में सरकार ने जो नई मंजूरी दी है उसके तहत जूनियर कमीशंड अधिकारी तथा अन्य रैंकों के लिए अंडों और फलों के ताजा जूस की मात्रा में वृद्धि की गई है। अगस्त, २०१० से ९००० फुट की ऊंचाई पर तैनात ऐसे अधिकारियों और जवानों को प्रतिदिन दो अंडे और फलों के जूस की मात्रा ११० ग्राम से बढ़ाकर २३० ग्राम कर दी गई है।

इसी प्रकार मांस उत्पादों की गुणवत्ता और मात्रा में भी सुधार किया गया है। इसके तहत ब्रायलर ड्रैस्ड चिकन की मात्रा ११० ग्राम से बढ़ाकर १८० ग्राम प्रतिदिन कर दी गई है। ड्रैस्ड मांस के विकल्प के रूप में प्रशीतित मांस, चिकन (ब्रायलर) मंजूर किया गया है। जवानों की पसंद के अनुसार बकरे, भेड़ के मांस की किसी भी मात्रा को मंजूरी दी गई है। आहार में विविधता के लिए अधिक समय तक ताजा बनाए रखने वाले रिटार्ट पाउच में "रेडी टु ईट" चिकन (ब्रायलर) शुरू किए गए हैं। १२,०० फुट की ऊंचाई पर तैनात जवानों के लिए विशेष राशन मंजूर किया गया है। पहले, विशेष राशन सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात जवानों के लिए ही होता था।


सुखाई गई डिहाइड्रेटेड सब्जियों की जगह अधिक समय तक ताजा रखने वाले रिटार्ट पाउचों में खाने के लिए तैयार सब्जियों की शुरुआत की गई है। अभी तक दूरदराज के और ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा सब्जियों के बदले सुखाई गई सब्जियों की अनुमति होती थी। सुखाई गई सब्जियां अधिक समय तक ताजी नहीं रहतीं। सरकार से अधिक समय तक ताजा रखने वाले रिटार्ट पाउचों में खाने के लिए तैयार सब्जियों की मंजूरी ली गई है।

बख्तरबंद यूनिटों तथा बख्तरबंद युद्धक वाहनों वाली अन्य यूनिटों में तैनात अन्य रैंकों को पहले प्रति व्यक्ति प्रतिदिन सोडे की चार बोतलों की मंजूदरी होती थी। सोडा बनाने की तकनीक पुरानी पड़ चुकी है और बाजार में तकनीकी प्रगति के अनुरूप नहीं थी। इसलिए इस यूनिट को ३०० एमएल कार्बोनेटिड साफ्ट ड्रिंक्स प्रतिदिन देने का फैसला किया गया है। इसके विकल्प में नींबू आधारित साफ्ट ड्रिंक्स २५० मिली लीटर प्रतिदिन या फलों का रस, लस्सी, नारियल पानी २५० मिली लीटर प्रतिदिन दिया जाएगा(नई दुनिया,दिल्ली,19.8.11)।

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