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19 अक्तूबर 2011

ग्रुप-डिस्कशन

ग्रुप-डिस्कशन अथवा सामूहिक विचार-विमर्श, एक प्रकार का वार्तालाप है, जिसमें एक समूह में विभिन्न सदस्य भाग लेते हैं तथा किसी विषय पर अपने-अपने विचार प्रकट करते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के चयन में ग्रुप डिस्कशन का बहुत महत्व है। सुलझे विचार, नेतृत्व क्षमता और सामूहिक स्वीकृति विद्यार्थी को सफलता प्रदान करती है।
आज जिस प्रकार से बाजार में विभिन्न कंपनियां अपने उत्पादों को उपभोक्ताओं के समक्ष पेश कर रही है, बैंक तथा बीमा क्षेत्र में बदलाव आ रहे हैं, वैसी परिस्थितियों में उच्चाधिकारियों द्वारा मिल-बैठ कर विचार-विमर्श के पश्चात ही कोई ठोस आर्थिक कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में ग्रुप डिस्कशन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
ग्रुप डिस्कशन के द्वारा सदस्यों के आत्मविश्वास, मानसिक सजगता, स्वयं के प्रभावी विचार, दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान, किसी भी विषय पर अपना आपा खोए बिना विचार-विमर्श करने की क्षमता, तार्किक शक्ति आदि की जांच की जाती है। ग्रुप डिस्कशन में सामान्यत: आठ सदस्य होते हैं जो वृत्ताकार अथवा अद्र्धवृत्ताकार ढंग से एक-दूसरे के सम्मुख स्थान ग्रहण करते हैं। प्रतियोगियों में ग्रुप डिस्कशन के लिए प्राय: दिए गए दो विषयों में से किसी एक विषय का चयन बहुमत के आधार पर किया जाता है। जैसे ही ग्रुप डिस्कशन आफिसर (जीटीओ) की घोषणा करते हैं, सदस्यों को चाहिए कि वे अपने मनोनुकूल एक विषय का चुनाव कर शीघ्रता से उससे संबंधित तथ्यों का आत्मंथन करें। जीटीओ द्वारा डिस्कशन शुरू करने का संकेत देने के साथ ही वार्तालाप प्रारंभ हो जाना चाहिए। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक होगा कि प्रत्येक डिस्कशन के लिए एक निश्चित समय सीमा तय कर दी जाती है। जो सदस्य जैसी योग्यता का प्रदर्शन करता है वैसे ही अंक प्राप्त करता है।
ग्रुप डिस्कशन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखें :
अगर चर्चा की शुरूआत आपको करनी है, तो उसी विषय पर बातचीत करनी चाहिए जिस विषय पर आपका ज्ञान अच्छा है।
अपना पक्ष प्रभावी रूप से रखने के लिए भाषा पर आपकी पकड़ होना बहुत ज़रूरी है।
डिस्कशन के दौरान ठहाका लगाकर हंसना या किसी साथी के कमजोर तर्क या भाषा आदि का मजाक उड़ाना असभ्यता माना जाता है।
वक्ता होने के साथ ही आपको अच्छा श्रोता भी होना जरूरी है। अगर किसी प्रतियोगी की बात पर आपको सहमति या असहमति व्यक्त करनी हो तो शालीनता के साथ अपना पक्ष रखें।
अन्य प्रतियोगियों को कमजोर या खुद को दूसरों से कमतर न आंकें।
किसी प्रतियोगी पर हावी होने की कोशिश न करें। जिद्दी और नकारात्मक रवैया आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
अगर भटके हुए विषय को आप सूझबूझ से वापस प्रवाह में ला सकें, तो आपका अच्छा प्रभाव पड़ेगा(अनिल कुमार,दैनिक ट्रिब्यून,5.10.11)।

1 टिप्पणी:

  1. है तो अच्छी बात लेकिन हमें नहीं लगता कि 100 ग्रुप डिस्कशन में से 95 में अतार्किक अध्यक्ष और संचालक नहीं होते, जिनका दिमाग भाड़े का है…

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