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15 नवंबर 2011

बिलासपुरःरिटायर्ड और मृतक भी ले रहे हैं वेतन

सेवा देने के बाद भी वेतन नहीं मिलने की बात तो आम है, लेकिन कहीं ऐसा शायद ही सुना होगा कि रिटायरमेंट और मौत के बाद भी किसी कर्मचारी को नियमित वेतन मिल रहा हो। बिल्हा बीईओ ने ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। यहां एक रिटायर्ड कर्मचारी की मौत के 7 माह बाद भी उसके नाम पर वेतन जारी किया जा रहा है, जबकि दूसरे कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद 4 माह की सैलरी दे दी गई। दोनों के नाम पर हर माह पेंशन भी जारी की जा रही है। अब गड़बड़ी पकड़ी गई है तो अधिकारी ई-पेमेंट को कारण बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

शहर के विद्या उपनगर स्थित प्राथमिक स्कूल में अशोक कुमार पांडेय बतौर प्रधान पाठक कार्यरत थे। 5 मार्च 1949 को शिक्षा विभाग में पदस्थ होने वाले श्री पांडेय की सेवा अवधि 31 मार्च 2011 को समाप्त हो गई, यानी वे इसी दिन सेवानिवृत्त हो गए। शिक्षा विभाग ने अप्रैल में भविष्यनिधि, पेंशन जैसी उनकी तमाम देनदारियों का भुगतान कर दिया। इसके बाद श्री पांडेय का नाम शिक्षा विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों की सूची में शामिल हो गया, लेकिन बिल्हा बीईओ ने उन्हें कार्यरत ही माना।


शायद यही वजह है कि श्री पांडेय के खाते में हर माह 33 हजार 699 रुपए बतौर वेतन नियमित जमा होते रहे। इधर, अगस्त 2011 में श्री पांडेय की मौत हो गई, लेकिन बिल्हा बीईओ दफ्तर का रिकार्ड उन्हें आज भी जिंदा और प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत बता रहा है। श्री पांडेय को सितंबर 2011 का वेतन बिल क्रमांक 509 के तहत 17 अक्टूबर 2011 को दिया गया है। वेतन सीधे उनके खाते में जमा कराया जा रहा है। इस तरह स्व. पांडेय के खाते में 6 महीने का वेतन अतिरिक्त जमा कर दिया गया। दूसरा मामला भी शहर के स्कूल का ही है। कन्या प्राथमिक स्कूल मगरपारा में बतौर प्रधान पाठक कार्यरत रहे दौलतराम जाधव 30 जून 2011 को रिटायर्ड हो गए।

बिल्हा बीईओ इन्हें भी कार्यरत मान रहा है और नियमित वेतन भुगतान किया जा रहा है। श्री जाधव के खाते में सितंबर तक का वेतन जमा हो चुका है और अक्टूबर का वेतन देने की तैयारी है। उन्हें सितंबर का वेतन बिल क्रमांक 508 के तहत 17 अक्टूबर 2011 को दिया गया। साफ है कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद भी 3 महीने का वेतन दिया गया है, जबकि चौथे महीने का वेतन देने की तैयारी है।

पहली लापरवाही नहीं
बिल्हा बीईओ द्वारा वेतन भुगतान में गड़बड़ी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले हाईस्कूल फरहदा में पदस्थ शिक्षाकर्मियों के वेतन भुगतान में लापरवाही सामने आई थी। हाईस्कूल फरहदा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के द्वारा संचालित है। केंद्र से फरहदा स्कूल के सेटअप को वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली है, लिहाजा शिक्षाकर्मियों को वेतन नहीं दिया जा सकता। बिल्हा बीईओ ने यहां पदस्थ 5 में से 3 शिक्षाकर्मियों को दूसरे मद से वेतन दे दिया।

रिटायर्ड कर्मचारियों को नियमित वेतन और पेंशन दिया जाना गंभीर मामला है। ऐसा हुआ है तो यह जांच का विषय है और निश्चित तौर पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
एमएल सोनवानी, डीईओ, बिलासपुर

सैलरी, पेंशन.. फिर वेतनवृद्धि भी कर दी
बिल्हा बीईओ ने लापरवाही की गजब मिसाल पेश की है। रिटायर्ड और मौत के बाद भी इन दो कर्मचारियों को वेतनवृद्धि का लाभ मिला। श्री पांडेय को जून 2011 तक 33 हजार 667 रुपए वेतन दिया गया। इतनी ही राशि श्री जाधव को भी मिली। हर साल की तरह जुलाई 2011 में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को वेतनवृद्धि मिली। कर्मचारियों को मूल वेतन की तीन फीसदी राशि वेतनवृद्धि के रूप में दी गई। इस हिसाब से दोनों का वेतन 33 हजार 667 रुपए से बढ़कर 34 हजार 990 रुपए हो गया। बीईओ कार्यालय के कर्मचारियों को नया वेतन निर्धारण करते समय भी ध्यान नहीं रहा कि दोनों कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं।

ई-पेमेंट के कारण गड़बड़ी: बीईओ

बिल्हा बीईओ यूएस जायसवाल ने रिटायर्ड और मृत व्यक्ति को वेतन जारी होने के लिए ई-पेमेंट सिस्टम को कारण बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी रिटायर हो जाते हैं, लेकिन कंप्यूटर में कर्मचारियों का नाम दर्ज रहता है। कंप्यूटर के आधार पर कर्मचारियों के खाते में वेतन जमा किया जाता है। इन मामलों में भी इसी तरह की गड़बड़ी हुई है। गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद रिकवरी की जा रही है।

आगे क्या
किसी कर्मचारी के खाते में वेतन की राशि ज्यादा या गलत जमा हो जाए तो विभाग उसे आसानी से हासिल कर सकता है। बैंक के जानकार बताते हैं कि विभाग अपने लेटरहैड में पुष्टि करेगा कि किस कर्मचारी के खाते में कितनी ज्यादा राशि जमा हुई है। राशि शासन के खाते में जमा करने के लिए पत्र लिखा जाएगा, जिस पर बैंक अतिरिक्त राशि उस खाते में वापस कर देगा, जहां से राशि आई थी।

..तो और लंबी हो सकती है प्रक्रिया
मृत कर्मचारी को वेतन जारी करने के मामले बिल्हा बीईओ की समस्या बढ़ सकती है। बैंक के जानकार बताते हैं कि मृतक का खाता अगर ज्वाइंट होगा तो संबंधित व्यक्ति वेतन आहरित कर रहा होगा। ऐसी स्थिति में मामला कोर्ट का होगा। इसके अलावा नामिनी द्वारा आपत्ति लगाने से भी प्रक्रिया जटिल हो जाएगी। ऐसी स्थिति में मामले का निपटारा बीईओ और नामिनी की सहमति पर निपटेगा या फिर कोर्ट तय करेगा कि राशि पर किसका अधिकार है(संजीव पांडेय,दैनिक भास्कर,बिलासपुर,14.11.11)।

1 टिप्पणी:

  1. खबर शुरू में गड़बड़ी करती है…अब सब कोई थोड़े जानता है कि बिल्हा कहाँ है?…वैसे वेतन का मामला भी होता रहता है…यह ध्यान में आ गया है…

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