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14 दिसंबर 2011

जम्मूः1200 के लिए हाथ फैलाए खड़े हैं पढ़े-लिखे नौजवान

सुनने में यह बात बेशक अटपटी लगे पर सच है कि जम्मू में कई ऐसे युवा हैं जो पोस्ट ग्रेजुएट होने के बावजूद घर पर निठल्ले बैठे हैं। उन्हें सरकार से मात्र 1200 रुपए का वालंटरी सर्विस अलाउंस (वीएसए) लेना तो मंजूर है। लेकिन प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करना उन्हें गवारा नहीं। हैरानी की बात है ऐसे लोगों की इस लिस्ट में एमबीए, एमसीए, एमएससी आईटी, बीएड और एमएड जैसे प्रोफेशनल कोर्स करने वाले युवा भी शामिल हैं। उन्होंने सरकार को लिखित में कहा है कि उक्त डिग्रियां करने के बाद भी उन्हें अब तक रोजगार नहीं मिल पाया। जबकि वीएसए से अधिक तनख्वाह वाली सैकड़ों नौकरियां प्राइवेट सेक्टर में उपलब्ध हैं।

उम्र 26 साल लेकिन कोई काम नहीं : हाल ही में डिस्ट्रिक्ट इंप्लायमेंट एंड काउंसलिंग सेंटर द्वारा उन व्यक्तियों की सूची सार्वजनिक की गई है जो शेरे कश्मीर इंप्लायमेंट एंड वेलफेयर पॉलिसी फार यूथ के अंतर्गत सरकार से वीएसए हासिल कर रहे हैं। यह व्यक्ति पॉलिसी की सभी शर्तें पूरी करते हैं। मसलन उनकी आयु 26 से 37 के बीच है, उनकी वार्षिक पारिवारिक आमदनी 1.5 लाख रुपए से कम है, वो न तो कोई सरकारी नौकरी करते हैं और न ही प्राइवेट, न ही उनकी पत्नी या पति कोई नौकरी करता है।


नौकरियां हैं नहीं या करना नहीं चाहते : वीएसए पाने वालों की सूची पर नजर डालने पर पता चलता है कि उसमें आठ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग कर रखी है। इसके अलावा, 8 ने एमबीए, 5 ने एमसीए, 20 ने बीएड, 15 ने एमएड जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज कर रखे हैं। जम्मू जिला में वीएसए पाने वालों की संख्या 1100 के आसपास है। इनमें से 186 पोस्ट ग्रेजुएट व 300 ग्रेजुएट हैं। पोस्ट ग्रेजुएट महिलाओं को 1250 रुपए मिलते हैं जबकि पोस्ट ग्रेजुएट पुरुषों को 1200 मिलते हैं। उसी प्रकार ग्रेजुएट महिलाओं को 1050 व पुरुषों को 1000 रुपए दिए जाते हैं। इन आंकड़ों से साबित होता है प्रोफेशनल कोर्सेज करने वालों के लिए भी नौकरियां नहीं है। ऐसे में जानने की आवश्यकता है कि क्या वाकई में नौकरियां नहीं है या प्राइवेट नौकरी से यह लोग मुंह मोड़ रहे हैं।

जम्मू यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट आफ लाइफ लांग लर्निग की निदेशिका डॉ. पूनम धवन ने हैरानी जताई कि युवा वर्ग 1200 रुपए का वीएसए लेने को तैयार है। उनके अनुसार सामान्य ग्रेजुएट भी तीन-चार हजार की प्राइवेट नौकरी आसानी से हासिल कर सकता है। वहीं, पोस्ट ग्रेजुएट व प्रोफेशनल कोर्सेज करने वाले व्यक्ति कहीं भी पांच हजार से अधिक प्रति माह की तनख्वाह पा सकते हैं। अगर दूरदराज इलाके का कोई व्यक्ति नौकरी हासिल नहीं कर पाता है तो बात समझ में आती है। लेकिन शहर या उसके आसपास रहने वालों को प्राइवेट नौकरी भी नहीं मिल रही यह नामुमकिन सी बात है। युवाओं को अपनी मानसिकता को विस्तृत करने की जरूरत है।

गांधी नगर में प्लेसवेल करियर नाम की प्लेसमेंट एजेंसी चलाने वाले जतिंद्र सिंह सूदन ने बताया कि उनके पास मैट्रिक से लेकर पीएचडी उम्मीदवारों के लिए सैकड़ों नौकरियों के ऑफर हैं। न्यूनतम साढ़े तीन हजार रुपए की नौकरी तो वो हर किसी को दिलवा सकते हैं। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि व्यक्ति दिल लगा कर काम करने वाला हो। यदि व्यक्ति के पास प्रोफेशनल डिग्री है तो उसे अच्छा पैकेज मिल सकता है। उनके अनुसार प्राइवेट नौकरियों का बाजार में ढेर है, लेकिन संजीदा उम्मीदवार ही नहीं मिलते। युवाओं को चाहिए कि वो अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं न कि सरकारी नौकरी के इंतजार में अपना बहुमूल्य समय बिता दें(देवेंद्र पाधा,दैनिक भास्कर,जम्मू,14.12.11)।

1 टिप्पणी:

  1. वाह क्या दिमाग पाए हैं ये लोग! आइए हिसाब देखते हैं। अकेले बिहार मे बीसीए-बीबीए करनेवाले की संख्या 25-30 हजार से कम नहीं है लेकिन इनके लिए नौकरी 2500 भी बिहार में प्रतिवर्ष नहीं है। बस समझ लीजिए खेल क्या है, कैसा है?

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