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12 दिसंबर 2011

दिल्ली के स्कूलों में लागू रहेंगे दो तरह के शिक्षा कानून

राजधानी के सभी स्कूलों में दो तरह के शिक्षा के कानून लागू रहेंगे। इनमें से एक दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट- 73(डीएसईएआर) व दूसरा राइट टू एजुकेशन एक्ट-2009 होगा। स्कूलों में राइट टू एजुकेशन एक्ट पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक लागू रहेगा। जबकि 9वीं से 12वीं तक स्कूलों में डीएसईएआर लागू रहेगा। शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी के अनुसार दिल्ली में यदि स्कूलों को इसे लेकर कोई भ्रम है तो वह इसे दूर कर लें। अधिकारी के अनुसार यदि दोनों ही कानून के नियम कहीं आपस में टकरा रहे हैं या कोई इससे संबंधित अन्य बात स्कूलों की तरफ से निदेशालय की जानकारी में लाया जाता है, तो इस पर निदेशालय अपना स्पष्टीकरण देगा। राजधानी में दो तरह के शिक्षा के कानून को लेकर स्कूलों में भ्रम की स्थिति है। सोशल जूरिस्ट संस्था के संयोजक अशोक अग्रवाल ने बताया कि डीएसईएआर के तहत दाखिले के वक्त प्रमाणपत्रों के न होने पर हलफनामा लेने की बात कही गई है। जबकि राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत 8वीं तक के दाखिले में किसी तरह का हलफनामा लेने से मना किया गया है। इसी प्रकार, डीएसईएआर में दाखिले 31 अगस्त तक करने का नियम है, जबकि आरटीई में सारे साल दाखिले का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा डीएसईएआर में 14 साल तक की आयु के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का नियम बनाया गया है। जबकि आरटीई में 6 से 14 साल तक की आयु के विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देने की बात कही गई है। इसी प्रकार, सहायता प्राप्त स्कूलों में डीएसईएआर के नियमानुसार 12वीं तक के स्कूल के लिए प्रबंध समिति के गठन का प्रावधान है। जबकि आरटीई में 8वीं कक्षा तक के स्कूल में प्रबंध समिति के गठन का प्रावधान है। पीतमपुरा स्थित एमएम पब्लिक स्कूल के निदेशक सोमेश पाठक ने कहा कि निदेशालय द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दिल्ली में कौन सा कानून लागू रहेगा। दो तरह के अलग-अलग कानून के लागू होने से भ्रम की स्थिति बनी रहती है। दोनों कानून के नियम कुछ जगहों पर आपस में टकरा रहे हैं। स्कूल की प्राचार्यरूमा पाठक ने कहा कि दिल्ली के स्कूलों में शिक्षा के कानून को लेकर काफी असमंजस की स्थिति है कि वर्तमान में शिक्षा का कौन का कानून चल रहा है। यदि दोनों कानून चल रहे हैं तो इसके बारे में निदेशालय को कोई स्पष्टीकरण देना चाहिए। सोशल जूरिस्ट संस्था के संयोजक अशोक अग्रवाल ने कहा कि सरकार को पहली से बारहवीं कक्षा तक के लिए एक ही कानून लागू करना चाहिए। पूरा स्कूल एजुकेशन निशुल्क होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो बच्चा 8वीं तक फीस नहीं दे सकता है, वह 9वीं में फीस देने के लिए कहां से रुपये लाएगा। नेशनल स्कूल प्रोग्रेसिव कान्फ्रेंस के चेयरमैन एलवी सहगल ने कहा कि निदेशालय को शिक्षा के दो कानूनों को लेकर असमंजस दूर करते हुए स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए(राकेश नाथ,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,12.12.11)।

1 टिप्पणी:

  1. पढ़ने से तो नियम अच्छे लग रहे हैं बाकी तो लागू होने की बाद ही पता चलेगा ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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