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30 सितंबर 2010

केंद्रीय विवि में नामांकन के लिए देनी होगी प्रवेश परीक्षा

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए छात्रों को अब सामान्य प्रवेश परीक्षा देनी पड़ सकती है। इन विश्वविद्यालयों के उप कुलपति इसके लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने सम्मेलन में लिए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की तरह शानदार प्रदर्शन करने वाले केंद्रीय विश्वविद्यालयों को नवरत्‍‌न का दर्जा देने पर आम सहमति बन गई है। देश में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी को दूर करने और बीएड की राह आसान बनाने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने नई पहल करने का फैसला किया है। इसके तहत केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तीन साल के बीए और बीएससी के कोर्स के साथ ही एक साल का बीएड का कोर्स शुरू किया जाएगा। कपिल सिब्बल ने कहा कि बीए या बीएससी करने वाला छात्र चाहे तो एक साल का बीएड कोर्स कर सकता है। अगले शैक्षिक सत्र से इसे शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालय आपसी समझौते के आधार पर क्रेडिट ट्रांसफर करने के लिए तैयार हो गए हैं। इसके तहत किसी एक विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला छात्र अपना कोर्स पूरा करने के पहले ही अपनी की गई पढ़ाई को दूसरे विश्वविद्यालय में जारी रख सकता है। उपकुपतियों के सम्मेलन में श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों को भी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की तर्ज नवरत्न का दर्जा दिए जाने का फैसला लिया गया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि नवरत्न विश्वविद्यालय के दर्जे के लिए मानदंड अगले दो महीने में तय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे विश्वविद्यालयों को ज्यादा आर्थिक व शैक्षणिक स्वायत्ता देने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ अब केंद्रीय विश्वविद्यालयों में चपरासी से लेकर उपकुलपति तक के लिए आचार संहिता बनायी जाएगी। साथ ही उपकुलपतियों ने विश्वविद्यालयों की संपत्ति के अधिकतम उपयोग करने का फैसला किया है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सामान्य प्रवेश परीक्षा के संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि छात्रों के नामांकन के समय प्रवेश परीक्षा के साथ ही 12वीं में उसके अंकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों को यह स्वायत्तता होगी कि वह 12वीं के अंक और प्रवेश परीक्षा परिणाम में किसको कितनी तरजीह देता है। उन्होंने कहा कि यह प्रवेश परीक्षा सामान्य ज्ञान पर आधारित होगी। कुछ विश्वविद्यालयों में इस परीक्षा के विरोध की आशंका को देखते हुए कपिल सिब्बल ने साफ कर दिया कि यह प्रवेश परीक्षा थोपी नहीं जाएगी। उन्होंने साफ कर दिया कि प्रवेश परीक्षा की पूरी रूपरेखा बनाने में अभी समय लगेगा और इसे अगले शैक्षिक सत्र से शुरू नहीं किया जा सकेगा(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,30.9.2010)।

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