आज का दिन पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह बाइबिल का हिब्रू से लैटिन में अनुवाद करनेवाले संत जेरोम के दिन के रूप में मशहूर है। संत जेरोम को अनुवादकों का संरक्षक भी कहा जाता है। पहली बार 1991 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ट्रांसलेशन (फिट) ने उनके सम्मान में 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। प्रो. गोइनी बैंग और फिट की लोक संपर्क समिति ने अनुवादकों की निष्ठा और समर्पण को याद करने के उद्देश्य से इसे शुरू किया था। इस मौके पर दुनिया भर में अनुवाद के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष की थीम है- ट्रांसलेशन क्वालिटी फॉर ए वैरायटी ऑफ वॉयस।
अनुवाद कर्म उतना ही पुराना पेशा है, जितनी मानवता। आज के भूमंडलीकृत युग में अनुवाद की महत्ता काफी बढ़ गई है। अनुवाद कर्म केवल दो भाषाओं ही नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच सेतु का काम करता है। हमारे देश में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए एक सरकारी अनुवाद संस्था ट्रांसलेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया है, जिसका गठन कार्यालयी हिंदी की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक मार्च, 1971 को किया गया था। केंद्र सरकार की यह मात्र अकेली संस्था है, जो अनुवाद कार्यों के अलावा अनुवाद का प्रशिक्षण भी देती है।
देश में निजी स्तर पर अनुवाद कार्य में संस्थाएं लगी हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण अनुवादक की कमी के चलते भारतीय भाषाओं के साहित्य का अंगरेजी या अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद बहुत कम हो पाता है। नतीजतन यहां का साहित्य विदेशों में कम पहुंच पाता है। यहां तक कि देश की भाषाओं के बीच अनुवाद का अभाव है। अंगरेजी या अन्य विदेशी भाषाओं से हिंदी में अनुवाद करनेवालों की भी भारी कमी है, जिस कारण बाहर के ज्ञान की किरण यहां तक नहीं पहुंच पाती(अमर उजाला,दिल्ली,30.9.2010)।
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30 सितंबर 2010
आज अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस है
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ज्ञानवर्धक जानकारी ........ आभार
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क्यों बना रहे है नकली लोग समाज को फ्रोड ?.