30 सितंबर 2010

उत्तराखंडःगरीब बच्चों को सरकार दिलाएगी निजी स्कूल में दाखिला

उत्तराखंड में गरीब और वंचित वर्गो के बच्चे शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों के मोहताज नहीं रहेंगे। सरकार उन्हें नजदीकी प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिलाएगी। इस कार्य को सुविधाजनक बनाने के लिए प्राइमरी व अपर प्राइमरी के तकरीबन 20 हजार स्कूलों की मैपिंग होगी। मैदानी जिलों में सेटेलाइट और पर्वतीय जिलों में पटवारी व राजस्व कर्मचारियों के सहयोग से मैनुअल मैपिंग की जाएगी। शिक्षा के नजरिए से वंचित वर्गो के चिन्हीकरण को शासन स्तर पर एडवाइजरी काउंसिल का गठन होगा। सरकार ने तय किया है कि राज्य की विषम परिस्थितियों के मद्देनजर स्कूल मैपिंग अलग-अलग ढंग से कराई जाएगी। मैपिंग से सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की सही लोकेशन और आसपास की आबादी और वंचित वर्गो के बच्चों का ब्योरा सरकार के पास रहेगा। इससे नजदीकी प्राइवेट स्कूलों में भी बच्चों को दाखिला दिलाने में सहूलियत मिलेगी। वंचित वर्गो के छह से 14 साल के बच्चे आवाजाही में दिक्कत की वजह से स्कूल से वंचित नहीं रहेंगे। साथ ही अभिभावकों के पास प्राइवेट स्कूल में दाखिले का विकल्प रहेगा। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों को भी 25 फीसदी बच्चों को दाखिला देना होगा। केंद्रीय एक्ट के मद्देनजर राज्य ने भी आरटीई प्लान में इसकी कार्ययोजना बना ली है। प्राइवेट स्कूल में दाखिला लेने को 25 फीसदी से ज्यादा बच्चों की दावेदारी होने की स्थिति में चयन लॉटरी के जरिए होगा। स्कूल मैपिंग को लेकर आंध्र प्रदेश में अपनाए गए पैटर्न का भी अध्ययन किया जाएगा। आंध्र प्रदेश में स्कूल मैपिंग के लिए सेटेलाइट का सहारा लिया गया। उत्तराखंड की विषम परिस्थितियों विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों की विरल आबादी और आबादी से दूर बने स्कूलों की मैपिंग राजस्व विभाग के सहयोग से कराई जाएगी। इसमें पटवारियों व राजस्व विभाग के कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। अलबत्ता, मैदानी जिलों में स्कूल मैपिंग सेटेलाइट के जरिए कराई जाएगी। शिक्षा सचिव मनीषा पंवार के मुताबिक आंध्र पैटर्न के अध्ययन को हैदराबाद टीम भेजने पर विचार किया जा रहा है(रविंद्र बड़थ्वाल,दैनिक जागरण,देहरादून,30.9.2010)

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