शिक्षा प्रणाली और शिक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड मूल्यांकन और शोध केंद्र तैयार कर रहा है। यह केंद्र पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर तैयार किया जाएगा।
शिक्षकों के शिक्षण और छात्रों के अध्ययन में विशेष काम करने वाले इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य स्कूल के मूल्यांकन को बेहतर बनाना, प्रवेश परीक्षाओं के लिए छात्रों को तैयार करना, भारतीय शिक्षण, उसकी पॉलिसी और कार्यक्रमों में शोध करना जिससे कि शिक्षण के स्तर को बेहतर बनाया जा सका और छात्र ज्यादा सीखें। केंद्र स्कूलों, शिक्षकों, शिक्षण और छात्रों पर शोध करके पहले यह तैयार करेगा कि कहां सुधार दिया जाना है। इसके साथ ही इसका पूरा फोकस शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाना है।
इस केंद्र में तीन विभाग शोध और मूल्यांकन विभाग, व्यवसायी विकास और नेतृत्व विभाग और पब्लिकेशन विभाग होगा। शोध और मूल्यांकन विभाग स्कूल के मूल्यांकन के दिशा निर्देश तय करेंगे। यह छात्रों के विकास के लिए विभिन्न टेस्ट कराएंगे और छात्रों का रिकॉर्ड भी रखेंगे। यह विभाग पहले तैयार पॉलिसी का ट्रायल करेगा, फिर स्कूलों में लागू किया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और प्रशिक्षित विशेषज्ञ शिक्षकों को प्रशिक्षण देगा। सीबीएसई का कहना है कि विभाग अगले दो वर्ष में सतत और समग्र मूल्यांकन के तहत शिक्षकों के लिए मूल्यांकन के साधन और दिशा निर्देशों को तैयार कर लेगा। विभाग विभिन्न स्कूलों से छात्रों को रिकार्ड भी मंगवाएगा और देखेगा कि कहां सुधार दिया जा सकता है।
व्यवसायिक विकास और लीडरशिप विभाग शिक्षकों को अलग-अलग प्रशिक्षण देगा। यह पता किया जाएगा कि शिक्षण में कहां समस्याएं आ रही हैं। यह विभाग शिक्षण प्रबंधन के साथ मिलकर इन मुद्दों की बातचीत और सुधार के लिए बैठकें भी करेगा। शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रमों में स्कूल भाग ले पाएंगे। शिक्षक भी शिक्षण से जुड़ी समस्याओं की चर्चा इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों या बैठकों में कर पाएंगे।
सीबीएसई के मुताबिक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के लिए विदेशों से संस्थाओं को जो जोड़ा जाएगा। इस केंद्र के जरिए अगले पांच वर्षों में शिक्षण में ऐसा वातावरण तैयार कर दिया जाएगा जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। शिक्षकों के शिक्षण विधि को भी अलग रूप रंग दिया जाएगा(नई दुनिया,दिल्ली,30.9.2010)।
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