राजस्थान के सरकारी स्कूलों और मदरसों में उर्दू भाषा पढने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में है। सत्र शुरू होने के चार माह बाद भी स्कूलों में कहीं नई तो कहीं पुरानी किताबों से ही बच्चे पढाई कर रहे हैं। स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक उर्दू भाषा की दो तरह की किताबें चल रही हैं, जबकि प्रथम जांच परीक्षा भी हो चुकी है। मदरसा मुस्लिम मिडिल स्कूल चाकसू सहित कई ऎसे अन्य मदरसे भी हैं जहां ये किताबें नहीं पहुंची हैं।
पुरानी किताबें दी नोडल केन्द्रों ने सरकारी स्कूलों में उर्दू भाषा की किताबें अपने हिसाब से आवंटित कर दी। कई नोडल ने तो पाठयपुस्तक मण्डल से उर्दू की किताबें ही नहीं ली।
परीक्षा होगी नई से
समान परीक्षा योजना के तहत नई किताबों से ही परीक्षा होगी। लेकिन जानकारों का कहना है कि जो बच्चे पुरानी किताबों से पढाई कर रहे हैं, वे नई किताबों से कैसे परीक्षा देंगे।
यदि कहीं किताबें नहीं पहुंची हैं तो मैं इसकी जांच कराऊंगा। जिन्हें नई किताबें नहीं मिली हैं, वे नोडल केन्द्र से नई किताबें ले सकते हैं। परीक्षा नई किताबों से ही होगी। जे.पी. वर्मा, कार्यवाहक उपनिदेशक प्रारम्भिक शिक्षा
विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए विभाग को उर्दू भाषा की किताबें सत्र प्रारंभ में ही स्कूलों व मदरसों में नि:शुल्क उपलब्ध करानी चाहिए थी, लेकिन विभाग अभी भी सोया हुआ है। अमीन कायमखानी, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ(राजस्थान पत्रिका,जयपुर,1.10.2010)
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