05 अक्टूबर 2010

संस्कृत में नहीं दाखिल की जा सकती याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि इस न्यायालय में संस्कृत भाषा में लिखी याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान संस्कृत भाषा में लिखी याचिका दाखिल करने की अनुमति नहीं देता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि केवल याचिका ही नहीं, संस्कृत में न तो बहस करने की अनुमति दी जा सकती है और न ही कोई निर्णय, डिक्री, शपथपत्र या प्रार्थना पत्र ही स्वीकार किए जा सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने वीरेंद्र शाह शोध की याचिका पर दिया है। न्यायालय ने कहा है कि संविधान उप्र के न्यायालय में हिंदी में कार्य करने की अनुमति देता है। इस भाषा में कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की जा सकती हैं। परंतु किसी न्यायाधीश को हिंदी भाषा में निर्णय लिखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि याचिका हिंदी में दाखिल की गई है तब इस बात का प्रावधान है कि हाईकोर्ट में इसका अंग्रेजी में अनुवाद कराया जा सकता है । परंतु संस्कृत भाषा के संबंध में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है(नई दुनिया,दिल्ली,5.10.2010)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।