04 अक्टूबर 2010

दुर्घटना में व्यक्तिगत क्षति का आकलन न करना गंभीर भूलःसुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने १७ साल पहले ट्रक चालक की गलती से दुर्घटना का शिकार हुए मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र को मुआवजा राशि बढ़ाकर नौ लाख रुपए कर दी है। इस हादसे में मेसरा स्थित बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान का यह मेधावी छात्र ७० फीसदी विकलांग हो गया और अब उसे जीवन पर्यंत एक सहायक की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आरएम लोढा ने इस हादसे में विकलांग हुए छात्र अरविन्द कुमार मिश्रा की अपील पर मुआवजा राशि बढ़ाने का आदेश दिया। जजों ने कहा कि न्यायाधिकरण और हाईकोर्ट ने अरविन्द की व्यक्तिगत क्षति का आकलन नहीं करके बड़ी भूल की थी। कोर्ट ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने में इस मेधावी छात्र की शैक्षणिक योग्यता और सभी सेमेस्टर के नतीजों, हादसे के कारण उसकी शिक्षा में आई बाधा और इंजीनियर बनने की स्थिति में उसकी आमदनी जैसे बिन्दुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस छात्र को सात अगस्त, २००२ से नौ फीसदी ब्याज के साथ नौ लाख छह हजार रुपए के मुआवजे की राशि का भुगतान किया जाए। दुर्घटना वाले दिन २३ जून, १९९३ को अरविन्द कुमार मिश्रा अपनी मोटर साइकिल से जा रहा था। दूसरी ओर से आ रहे ट्रक ने उसे जोर से टक्कर मारी और वह सड़क पर जा गिरा। इस दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी अरविन्द करीब दो महीने कोमा में रहा और उसके शरीर में कई हड्डियां टूट गई थी। अरविन्द का इलाज रांची, फिर गांधीनगर और फिर वेल्लोर तथा मद्रास के अस्पतालों में हुआ। अरविन्द का दावा था कि पढ़ाई के दौरान ही कैम्पस साक्षात्कार के दौरान टाटा और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रतिष्ठानों ने उसका चयन कर लिया था और उसे साढ़े तीन लाख रुपए सालाना का पैकेज देने की पेशकश की थी। अरविन्द ने इस दुर्घटना के लिए रांची स्थित मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में २२ लाख रुपए के मुआवजे का दावा किया था। न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि ट्रक मालिक और बीमा कंपनी इस छात्र को नौ फीसदी ब्याज के साथ ढाई लाख रुपए मुआवजा अदा करे। इस राशि को झारखंड हाईकोर्ट ने बढ़ाकर साढ़े तीन लाख रुपए कर दिया था लेकिन इससे संतुष्ट होने के बजाय अरविन्द ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था(अनूप भटनागर,नई दुनिया,दिल्ली,4.10.2010)।

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