झारखंड के कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति फादर बेनी एक्का के वित्तीय अनियमितता के कारण पदमुक्त होने के 72 घंटे के अंदर ही वेतन में घपलेबाजी का मामला उजागर हो गया। रांची से लेकर कोल्हान विवि तक चले इस खेल में 64 लाख से अधिक का गोलमाल पकड़ा गया है। दस्तावेजों के अनुसार, रांची और कोल्हान विवि के कुछ अफसरों की मिलीभगत से एक कालेज को हर माह वेतन मद में 2,20,875 से 3,40,864 लाख रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान किया गया। विवि के ऑडिट में यह अनियमितता पकड़ी गई। जांच में पता चला कि जमशेदपुर स्थित एक डिग्री कालेज को सितंबर 2009 में वेतन मद में 20,85,702 रुपये दिए गए,जिसमें से 17,44,858 का भुगतान किया गया। शेष रकम का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। इसी तरह अक्टूबर 2009 में 18,27,703 रुपये आवंटित हुए, 16,06,825 रुपये का भुगतान हुआ लेकिन 2,20,875 रुपये का ब्योरा नहीं दिया गया। विवि की ओर से गठित कमेटी ने 25 जून 2010 को अपनी रिपोर्ट में पूरे मामले को बड़ा घोटाला करार देते हुए तत्काल कार्रवाई की अनुशंसा की। 21 जुलाई 2010 को वित्त अधिकारी ने रिपोर्ट की प्रति कुलसचिव व कुलपति को भेजी। कुलसचिव ने कहा, जिस प्राचार्य पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, वह सिंडिकेट के माननीय सदस्य हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। दोषी पाए गये लोगों की वेतन निकासी पर रोक के प्रस्ताव को भी कुलसचिव ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह इससे सहमत नहीं हैं। इस तरह पूरी रिपोर्ट विवि स्तर पर दबा ली गई। न मानव संसाधन विकास विभाग को कुछ पता चला, न किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई(ब्रजेश मिश्र,दैनिक जागरण,जमशेदपुर,1.10.2010)।
अच्छी जानकारी!
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