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05 अक्टूबर 2010

विश्व भारती विश्वविद्यालय विश्व धरोहर बनने की ओर

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 150 वीं जयंती पर इससे बड़ी श्रद्धांजलि और क्या हो सकती है कि विश्व भारती को विश्व धरोहर में जगह मिल जाए। केंद्र सरकार के अनुरोध पर यूनेस्को ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। अगर संभव हुआ, तो विश्व भारती विश्वविद्यालय देश की 30वीं और पश्चिम बंगाल की तीसरी ऐसी धरोहर होगी, जिसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में जगह मिलेगी।

करीब 150 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय की नींव 1901 में गुरुवर रवींद्रनाथ ने एक स्कूल के रूप में रखी थी। इसकी स्थापना के पीछे गुरुदेव की सोच ऐसे शिक्षण संस्थान बनाने की थी, जहां पूरी दुनिया की शिक्षा मिल सके। इसलिए इसका आदर्श वाक्य रखा गया, जहां दुनिया एक घोसले में सिमटती है। वर्ष 1913 में जब रवींद्रनाथ टैगोर को गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, तो स्कूल को महाविद्यालय बना दिया गया और 1951 में केंद्र सरकार ने इसे विश्वविद्यालय घोषित कर दिया। आज यह केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जहां शोध कार्य भी होते हैं।

पश्चिम बंगाल के जुड़वा शहर शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन में बसा यह विश्वविद्यालय आज भी गुरुकुल संस्कृति की मिसाल है। यहां कुलपति को आचार्य और उप-कुलपति को उप-आचार्य कहा जाता है। इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय की निगरानी और संचालन का जिम्मा कर्म समिति संभालता है, जिसकी अध्यक्षता आचार्य करते हैं। इस विश्वविद्यालय के प्रांगण में स्कूल भी हैं। इसके चर्चित केंद्रों में चीन भवन, दर्शन भवन, आश्रम, पाठ भवन, कला भवन, संगीत भवन, रवींद्र भवन आदि महत्वपूर्ण हैं, जहां देश-विदेश के छात्र अध्ययन करते हैं। यहां वसंत उत्सव और पौष मेला जैसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजन भी होते हैं। सफल छात्रों की फेहरिस्त में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, ऑस्कर विजेता निर्देशक स्व. सत्यजीत रे, नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन सहित कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हैं(अमर उजाला,5.10.2010)।

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