हिमाचल सरकार पीटीए शिक्षकों को किसी भी तरह की राहत देने के मूड में नहीं है। छह साल से स्थायी नीति की मांग कर रहे पीटीए शिक्षकों को नियमित करना तो दूर उन्हें निकालने की तैयारी है। उनकी जगह नियमित नियुक्तियां की जा रही हैं। जल्द ही पांच सौ के करीब और शिक्षकों की नियुक्ति हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड के माध्यम से होने वाली है। हालांकि शिक्षा विभाग ने पीटीए के अगेंस्ट नियुक्ति न दिए जाने की बात कही है, लेकिन प्रभावशाली अभ्यर्थी मनपसंद स्टेशन पर नियुक्ति लेना चाहते हैं और ऐसे में उन स्टेशनों पर तैनात पीटीए को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ईश्वर दास धीमान ने स्पष्ट कहा है कि पीटीए शिक्षकों को सरकार ने बैचवाइज, कमीशन व अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड के माध्यम से नौकरी के अवसर दिए हैं। उन्हें दो साल की अवधि में कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने इनका लाभ नहीं उठाया। सरकार की पीटीए शिक्षकों को लेकर स्थायी नीति की कोई बाध्यता नहीं है। धीमान ने कहा कि पीटीए शिक्षकों को पहले ही बता दिया था कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति होने पर उन्हें पद से हटना पड़ेगा। हाल ही में सरकार ने अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड के माध्यम से वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में तीन सौ से अधिक पीजीटी को नियुक्ति दी है। इसी प्रकार पांच सौ विभिन्न विषयों के अध्यापकों की नियुक्ति भी होनी है। हाल ही में हुई नियुक्तियों में से कुछ अध्यापकों को पीटीए के अगेंस्ट भेजा गया है। इससे पीटीए शिक्षकों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। कांग्रेस कार्यकाल में पीटीए पर शिक्षक रखे जाने शुरू हुए। जून 2006 में इन्हें ग्रांट इन एड के माध्यम से वेतन दिए जाने की व्यवस्था की गई। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से पीटीए शिक्षकों का बुरा समय शुरू हुआ। जब-जब पीटीए शिक्षक हटाए गए, उन्होंने आंदोलन किए, लेकिन सरकार की मंशा शुरू से ही पीटीए को किसी तरह की राहत देने की नहीं है। मुख्यमंत्री से भी मिला महज आश्वासन पीटीए शिक्षकों की जगह नियमित नियुक्तियां न किए जाने की मांग को लेकर सोमवार को पीटीए शिक्षक मुख्यमंत्री से मिले। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से महज आश्वासन ही मिला। पीटीए संघ के अध्यक्ष विवेक मेहता के अनुसार मुख्यमंत्री ने उनसे भविष्य को लेकर तो कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया, लेकिन फौरी तौर पर यह विश्वास दिलाया है कि जहां तक संभव होगा नई नियुक्तियां खाली पदों पर ही की जाएंगी(दैनिक जागरण,शिमला,5.10.2010)।
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