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04 अक्टूबर 2010

दून समेत टॉप स्कूलों में मिलेगा गरीबों को भी एडमिशन

यदि केंद्र सरकार अपने फैसले पर अडिग रही, तो गरीब छात्रों को भी दून और शेरवुड जैसे नामी स्कूलों में पढ़ने का मौका मिलेगा। इन स्कू लों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के दायरे में लाने की कवायद शुरू हो गई है । इसके लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। कानून के मौजूदा प्रावधानों के तहत आवासीय स्कू ल इसमें कवर नहीं हो रहे हैं । मानव संसाधन मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस बाबत जल्दी ही विभिन्न पक्षों की बैठक बुलाने का फै सला किया है ।

आरटीई के तहत 2011 से सभी स्कूलों को 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करनी हैं । अगले साल पहली कक्षा से ये सीटें आरक्षित होंगी। जिन स्कूलों में पढ़ाई नर्सरी से शुरू होती हैं , वहां ये प्रावधान नर्सरी से लागू होंगे। लेकिन यदि कोई स्कूल दूसरी, तीसरी या छठवीं कक्षा से शुरू होता है तो इन्हीं कक्षाओं से गरीबों के लिए सीटें आरक्षित करनी होंगी। देश में लाखों नामी आवासीय स्कूल हैं , जिनमें उच्च तबके के बच्चे पढ़ते हैं । आरटीई अधिनियम में इन स्कूलों का जिक्र नहीं होने के कारण इन पर प्रावधान लागू नहीं हो रहे हैं ।

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव अंशु वैश्य ने माना कि आरटीई के प्रावधानों में आवासीय स्कूलों का जिक्र नहीं है। इसलिए, कानून के मौजूदा प्रावधानों के तहत आवासीय स्कूलों को गरीब बच्चों को एडमिशन के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। लेकि न सरकार इन स्कू लों को भी छूट देने के पक्ष में नहीं है । इसलिए एक्ट के दायरे में आवासीय स्कूलों को भी लाया जाएगा। इसके लिए पहल की जा रही है तथा जल्द ही विशेषज्ञों की बैठ क बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। उसके बाद देखेंगे कि अधिसूचना जारी करके या फिर कानून में संशोधन करके कै से आवासीय स्कूलों को इसके तहत लाया जा सकता है । वैश्य के अनुसार, शिक्षा का अधिकार कानून एक व्यापक कानून है। इसमें हर स्कू ल की भागीदारी आवश्यक है । इतना ही नहीं, इन स्कूलों में भविष्य में एडमिशन के लिए स्क्रीनिंग भी नहीं हो पाएगी। इन्हें लाटरी निकालकर ही एडमिशन देने होंगे (मदन जैड़ा,हिंदुस्तान,दिल्ली,4.10.2010)।

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