ट्यूशन सिस्टम के बढ़ते चलन पर रोक लगाने की पहल की गई है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने कहा है कि सरकारी, सरकारी सहायता पाने वाले और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के टीचर प्राइवेट ट्यूशन नहीं कर सकते। वे प्राइवेट टीचिंग की किसी भी गतिविधि से नहीं जुड़ सकते। निदेशालय ने कैपिटेशन फीस वसूलने पर भारी जुर्माना लगाने, एडमिशन में स्क्रीनिंग प्रोसेस पर रोक लगाने, कॉरपोरल पनिशमेंट (शारीरिक और मानसिक सजा) रोकने जैसे कई आदेश जारी किए हैं।
एजुकेशन डायरेक्टर पी. कृष्णमूर्ति ने बताया कि 'राइट टु एजुकेशन एक्ट-2009' के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ये आदेश जारी किए गए हैं। एक्ट में 6 से 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त और कंपलसरी एजुकेशन का प्रावधान है। इस एक्ट के सेक्शन 28 के मुताबिक, स्कूल टीचर प्राइवेट ट्यूशन नहीं कर सकता। निदेशालय के दूसरे आदेश में कहा गया है कि स्कूल किसी भी रूप में कैपिटेशन फीस नहीं वसूल सकता। अगर किसी स्कूल के खिलाफ कैपिटेशन फीस लिए जाने का आरोप साबित होता है तो स्कूल ने जितनी कैपिटेशन फीस वसूली होगी, उसका दस गुना तक जुर्माना वसूला जा सकता है।
कहा गया है कि एडमिशन के समय स्क्रीनिंग प्रोसेस भी गलत है। पैरंट्स, स्टूडेंट्स का इंटरव्यू या फिर पैरंट्स की क्वॉलिफिकेशन के आधार पर एडमिशन नहीं हो सकता। एडमिशन के समय स्क्रीनिंग प्रोसेस अपनाने वाले स्कूलों पर 50 हजार या इससे भी अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है। निदेशालय ने कहा है कि स्कूल में बच्चे को किसी तरह की सजा नहीं दी जानी चाहिए। शारीरिक सजा पर रोक है। बच्चे को मानसिक तौर पर परेशान करने की शिकायत को भी पूरी गंभीरता से लिया जाएगा। निदेशालय का मानना है कि स्कूलों में बच्चों की पिटाई की शिकायतें आ रही हैं। यह भी कहा गया है कि एलिमेंटरी एजुकेशन पूरी होने तक न तो बच्चे को फेल किया जा सकता है और न ही उसे स्कूल से निकाला जा सकता है(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,1.10.2010)।
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