चारों ओर से आलोचनाओं के बावजूद प्रो. दीपक पेंटल के पद पर बने रहने के मामले में एक नया पेंच आ गया है। डीयू के विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि वे पद छोड़ने से पहले हर विवादित मामले में क्लीन चिट हासिल कर लेना चाहते हैं, ताकि बाद में किसी झमेले में उनका नाम न आए। अपने फैसलों को सही ठहराने और तमाम प्रकरणों के जांच मामले पर से इसकी पुष्टि भी होती है। डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य डा. शिबा सी. पांडा ने कहा कि कुलपति तमाम मामलों में गलत फैसले लेने, नियम ताक पर रखने और लापरवाही बरतने के आरोपों से घिरे हैं। इन सभी मामलों की जांच या तो चल रही है या जांच रिपोर्ट आ गई है। कुलपति का कार्यकाल 31 अगस्त को खत्म हो गया था। इसके बावजूद बिना विजिटर की अनुमति प्रो. पेंटल जिस तरह पद पर बने हैं और तमाम मामलों को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं, उससे साफ जाहिर है कि वे पद का इस्तेमाल अब अपने बचाव और सभी मामलों बचकर निकलने के लिए कर रहे हैं। डा. राजीब रे ने भी कुलपति पर सभी मामलों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए नियमों को ताक पर रखकर पद पर बने रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब तक किसी मामले में प्रो. पेंटल ने ईसी या एसी सदस्यों की बैठक नहीं बुलाई तो अब लगातार बैठक बुलाने का यही औचित्य हो सकता है कि वे खुद को जल्द से जल्द साफ साबित कर दें। वहीं एसी सदस्य डा. राजीव कुमार वर्मा और डा. जे खुंटिया का कहना है कि प्रो. पेंटल सभी मामलों में अपने लिए क्लीन चिट हासिल होते ही तुरंत पद छोड़ देंगे(अमर उजाला,दिल्ली,5.10.2010)। | |
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