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30 सितंबर 2010

डूटा ने किया आंदोलन जारी रखने का ऐलान

सेमेस्टर सिस्टम पर डीयू प्रशासन की सख्ती के बावजूद यूनिवर्सिटी टीचर्स असोसिएशन (डूटा) अपने फैसले पर अडिग है। असोसिएशन ने बुधवार को इमरजेंसी मीटिंग की और टीचर्स से किसी भी दबाव में न आने की अपील की।

डूटा के अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि हमने टीचर्स को कहा है कि वे सैलरी काटने की अवैध धमकी से डरें नहीं। सेमेस्टर सिस्टम में पढ़ाने संबंधी किसी भी अंडरटेकिंग पर दस्तखत न करें और न ही अटेंडेंस रजिस्टर पर साइन करें। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हम केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल से मिलने गए थे। मीटिंग में उन्होंने यह स्वीकार किया कि सेमेस्टर सिस्टम पर फैसला लेने से पहले डीयू की अकैडेमिक और एग्जिक्यूटिव काउंसिल से सलाह नहीं दी गई, जो कि गलत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे, बावजूद इसके बुधवार तक कॉलेजों में टीचर्स की सैलरी नहीं पहुंची। ऐसे में मजबूरन हमें आंदोलन और तेज करना होगा। इसके तहत एक अक्टूबर को धरना प्रदर्शन करेंगे।

डीयू प्रशासन ने मौजूदा सेशन से यहां के अंडरग्रैजुएट साइंस कोर्सेज में सेमेस्टर सिस्टम लागू कर दिया है। नए सिस्टम में स्टूडेंट्स की सही ढंग से पढ़ाई हो, इसके लिए हर संभव कोशिश की जा रही है, लेकिन डूटा इस बात को मानने को तैयार नहीं है और शुरू से अब तक इसके विरोध में आंदोलन चला रही है। नया सिस्टम मानने के लिए टीचर्स पर दबाव बनाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने, नो वर्क नो पे का नियम भी लागू कर दिया है, बावजूद इसके विवाद खत्म होता नजर नहंी आ रहा है। सिलेबस पूरा न होने की वजह से अब नवंबर में होने वाले फर्स्ट सेमेस्टर के एग्जाम पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और एग्जाम की डेट आगे टलने के भी आसार हैं(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,309.2010)।

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