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30 सितंबर 2010

कानून में कॅरियर? यस योर ऑनर

वकालत का पेशा इन दिनों बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस क्षेत्र का तेजी से बदलता परिदृश्य दक्ष अधिवक्ताओं के लिए कॅरियर के विविध विकल्प पेश कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि आप विभिन्न अदालती निर्णयों से खुद को अपडेट रखें, जिनका मुकदमों में रिफरेंस के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या आपने कभी सोचा है कि आज ज्यादातर लोग लॉ में कॅरियर क्यों बनाना चाहते हैं, जबकि उन्हें इसके कई अधिनियम याद रखने पड़ते हैं और इसकी धाराओं को समझना पड़ता है? इसका सिर्फ एक ही जवाब है कि अपने तर्र्को के जरिए दूसरों से अपनी बात मनवाने की चुनौती का आनंद ही कुछ अलग है। जो लोग पहले से इस पेशे से जुड़े हैं, उनका कहना है कि जिरह करने का रोमांच, अपनी दलीलों के जरिए दूसरों को संतुष्ट करने की कला जैसी बातें आपको इस क्षेत्र में रहने का उत्साह देती हैं। कानूनी समस्याओं को सुलझाना तो वकालत के पेशे से जुड़ा सिर्फ एक पहलू है।

पेशे के बारे में
यह एक ऐसा क्षेत्र हैं, जिसमें कॅरियर के कई विकल्प उपलब्ध हैं। आज देश-विदेश में माहिर वकीलों की काफी मांग है। पिछले कुछ समय के दौरान लीगल प्रोफेशन में काफी बदलाव आया है। एक दशक पहले तक किसी ने कारपोरेट लॉ या कांट्रेक्ट लॉ के बारे में सुना भी नहीं होगा, लेकिन समाज में तेजी से हो रहे बदलावों ने आज क्रिमिनल लॉ, सिविल लॉ, लेबर लॉ, फैमिली लॉ, कारपोरेट लॉ, कांट्रेक्ट लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ और इंटरनेशनल लॉ जैसे कई विशिष्ट कानूनों को जन्म दिया है। जयपुर के प्रख्यात वकील पीयूष शर्मा कहते हैं, ‘वकालत को कॅरियर के रूप में अपनाने वाले शख्स को इस पेशे में रोमांच के साथ-साथ बौद्धिक संतुष्टि भी मिलती है। हालांकि सफल वकील बनने के लिए जरूरी है कि आप विभिन्न अदालती निर्णयों के बारे में लगातार अपडेट रहें। कोई मुकदमा लड़ते समय इन अदालती निर्णयों का हवाला दिया जा सकता है।’

इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति को इस तकनीक से जुड़ी नई-नई गतिविधियों के लगातार संपर्क में रहना चाहिए और विभिन्न मुकदमों का नियमित अध्ययन करते रहना चाहिए ताकि किसी केस में जिरह करते वक्त उचित बिंदुओं का हवाला दिया जा सके। इसी शहर के एक और प्रख्यात वकील नरेंद्र मेवाड़ा जो पिछले दस वर्र्षो से इस पेशे में हैं, का कहना है कि यह कुशाग्र बुद्धि वालों के लिए एक आदर्श पेशा है। वह कहते हैं, ‘ऐसा व्यक्ति जिसका बौद्धिक स्तर बेहतर हो और जिसमें तार्किक रूप से जिरह करने की क्षमता हो, वह इस पेशे को अपना सकता है।’ हालांकि नए-नए वकीलों को हो सकता है कि शुरुआत में सही तरह के केस और मुवक्किल न मिलें, लेकिन उन्हें अधीर नहीं होना चाहिए। एक बार वे अपने लक्ष्य में कामयाब हो गए, तो फिर उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ेगा।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वकालत का पेशा सबसे भरोसेमंद कॅरियर विकल्पों में से एक है और इंजीनियरिंग व मेडिकल कॅरियर की तरह इस कॅरियर में भी उछाल देखा जा रहा है। पीयूष शर्मा कहते हैं, ‘शुरुआत से ही लॉ स्टूडेंट्स को अपने विचारों में स्पष्टता और तार्किक सोच को रखना चाहिए। वे विभिन्न केस स्टडीज का विश्लेषण करें, जटिल कानूनी मसलों पर रिसर्च करें और लिखित व मौखिक संवाद में महारत हासिल करने की कोशिश करें।’

अन्य पेशों की तरह इस पेशे में भी उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि इसमें सम्मान के साथ-साथ अच्छी कमाई के अवसर भी मिलते हैं। यदि व्यक्ति सही समय पर उचित अवसरों का दोहन कर सके तो इसमें उसके आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।’

योग्यता व रोजगार
लॉ की कोई भी डिग्री इस क्षेत्र में आपके लिए पेशेवर अवसरों की अनेक राह खोल सकती है। आप चाहें तो सरकारी न्यायिक सेवा या प्रतिरक्षा सेवा में काम कर सकते हैं, प्राइवेट या पब्लिक सेक्टर की किसी कंपनी में जा सकते हैं, किसी लॉ फर्म में भी आपको रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा आपके पास प्राइवेट प्रैक्टिस करने का विकल्प तो हमेशा मौजूद है ही।

जहां कई वकील आम प्रैक्टिशनर बन प्रॉपर्टी डील, अनुबंध पत्र इत्यादि तैयार करने जैसे रोजमर्रा के काम करते रहते हैं, वहीं कुछ लोग कारपोरेट लॉ, कांस्टीट्यूशनल लॉ और सिविल लॉ में विशेषज्ञता हासिल कर ऊंचा नाम और दाम कमाते हैं। हमारे देश में लीगल प्रोसेस आउटसर्ो्िसग की प्रक्रिया भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। अनेक विश्वविद्यालय आज बारहवीं पास विद्यार्थियों के लिए पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स चलाते हैं। कई यूनिवर्सिटीज में अंडरग्रेजुएट लॉ कोर्स भी चलाया जाता है।

वैसे आज लॉ फ्रैशर्स कारोबारी फर्म्स के साथ जुड़ना ज्यादा पसंद करते हैं, जिनमें कमाई त्वरित होती है। कई कारपोरेट्स ने अपने यहां रोजमर्रा के मैनेजमेंट के हिसाब से इनहाउस काउंसिलिंग के लिए भी वकीलों की भर्ती करनी शुरू कर दी है। इसके अलावा आप चाहें तो कानूनी सलाहकार भी बन सकते हैं। साफ है कि इस क्षेत्र में आपके लिए अवसरों की कमी नहीं है। बस अपने रुझान के मुताबिक सही राह को पहचान उस पर आगे बढ़ने की जरूरत है।


संस्थान
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु
नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर
हयातुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर
नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल
वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूडिशियल साइंसेस, कोलकाता।

महत्वपूर्ण परीक्षाएं
कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट (क्लेट)
सिंबॉयोसिस एंट्रेंस टेस्ट
ऑल-इंडिया एंट्रेंस एग्जाम (एनएलयू)
सीईटी
लॉ स्कूल एडमिशन टेस्ट-इंडिया (एलएसएटी-इंडिया)
एंट्रेंस एग्जाम- आईआईटी खड़गपुर
(करिअर मंत्र,दैनिक भास्कर,21.9.2010)

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