फैशन इंडस्ट्री करियर के तौर पर असीम संभावनाओं से भरपूर है। इसमें उन लोगों के लिए जगह बनी हुई है, जो कपड़े को सपनों के पंख लगाने की महारत रखते हैं।
फैशन टेक्नोलॉजी
भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था में जो क्षेत्र तेजी से अपनी भागीदारी बढ़ा रहे हैं, उनमें फैशन इंडस्ट्री भी एक है। एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय फैशन इंडस्ट्री वर्ष 2012 तक 7 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगी। इसके अलावा 2012 तक डिजाइनर लेबल का बाजार 720 करोड़ का हो जाएगा। बच्चों के डिजाइनर कपड़ों का बाजार फिलहाल 12 हजार करोड़ का है। कहने का तात्पर्य यही है कि फैशन इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। इसमें सरकार भी पूरा सहयोग दे रही है। फैशन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने फैशन एंड डिजाइन प्रोमोशन काउंसिल का गठन किया है।
कार्य प्रकृति
एक फैशन डिजाइनर कपड़े के फैब्रिक, टेक्सचर, कलर कोड, एक्सेसरीज सहित परिधान के बारे में सोचता है, योजना बनाता है और इसे आकार देता है। फैशन उद्योग तीन स्तंभों पर टिका हुआ है- प्रोडक्टिविटी, सेल्स और लिक्विडिटी। प्रोडक्टिविटी में परिधान तैयार करने के लिए कपड़ा खरीदने से लेकर फिनिशिंग तक के हर पहलू को समझना होता है, ताकि जब ड्रेस बन कर तैयार हो तो कुछ खास हो, लागत तार्किक हो, बाजार और चलन के अनुरूप हो। यह तभी संभव है जब कपड़े की बनावट, रंग, चलन इत्यादि की जानकारी हो। एक फैशन डिजाइनर इन बातों को जान कर ही खुद को अलग दिखा सकता है।
फैशन डिजाइनर
एक फैशन डिजाइनर को कपड़े की बुनावट, कपड़े का ज्ञान, रंगों, डिजाइनों, सामग्रियों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। जब डिजाइनर अपने डिजाइन के प्रति पूरी तरह संतुष्ट हो जाता है तो वह किसी पेशेवर पैटर्न मेकर से सलाह लेता है। फैशन कलेक्शन में डिजाइनर हर एक सीजन में अपने होते कोतूर और मास मार्केट के लिए नए विचारों और नए प्रचलनों को सामने रखते हैं। एक डिजाइनर का ज्यादातर समय खोज और अनुसंधान में बीतता है, क्योंकि कब, क्या और कौन सा फैशन प्रचलन में आ जाए, इसकी जानकारी उसे होनी चाहिए।
फैशन का ट्रेंड बदलता रहता है। इस लिहाज से जिस व्यक्ति के पास मार्केटिंग एवं मर्केंडाइजिंग की अच्छी समझ होगी, वह इस मार्केट में टिक सकता है। इसके दो हिस्से हैं, अपेरल मर्केंडाइजिंग और विजुअल मर्केंडाइजिंग।
अपेरल मर्केंडाइजिंग
अपेरल मर्केंडाइजर पर मार्केटिंग की जिम्मेदारी ज्यादा होती है। उसे पिछले और वर्तमान तथ्यों, आंकड़ों का अध्ययन कर फैशन ट्रेंड का विश्लेषण करना होता है। यह फैशन बाजार की नई मांग को पूरा करने के लिए खरीदार, फैशन डिजाइनर और प्रोडक्शन टीम के साथ समन्वय करता है। अपेरल मर्केंडाइजर को फैशन ट्रेंड, टेक्सचर, सामग्री, कलर, बाजार की मांग और उत्पादन प्रक्रिया का ज्ञान होना चाहिए।
विजुअल मर्केंडाइजिंग
यह तुलनात्मक दृष्टि से एक नया क्षेत्र है, जिसमें नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। विजुअल मर्केंडाइजिंग विभाग का खास काम इंप्रेसिव विंडो डिस्प्ले तैयार करना होता है। विजुअल मर्केंडाइजर के लिए फैशन बुटीक, शॉपिंग मॉल और व्यापार केंद्रों में अवसर ही अवसर हैं। इसके अलावा वह शॉप फ्लोर, क्वालिटी कंट्रोल सुपरवाइजर, फैशन रिटेलर व एक्सपोर्ट मैनेजर के रूप में करियर संवार सकता है।
फैशन को-ऑर्डिनेटर
ये फैशन ट्रेंड, फैशन शो, विज्ञापन, बिक्री बढ़ाने और फैब्रिक डीलर को रंग, बटन व दूसरी फैशन जरूरतों की जानकारी देने का काम करते हैं। एक फैशन को-ऑर्डिनेटर में संवाद कौशल के साथ क्रिएटिविटी का होना भी जरूरी है।
टेक्सटाइल डिजाइनर
कपड़े के डिजाइन और प्रिंट से संबंधित काम टेक्सटाइल डिजाइनर करते हैं। वे पहले इसका स्केच बनाते हैं। टेक्सटाइल डिजाइनर वस्त्र उद्योग, फैशन उद्योग, आंतरिक साज-सज्जा के लिए काम करते हैं। ये पेशेवर डिजाइनर और फ्रीलांस डिजाइनर के रूप में भी काम कर सकते हैं।
फैशन स्टाइलिस्ट
फैशन प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने और फैशन शोज के कार्यों के को-ऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी फैशन स्टाइलिस्ट की होती है। इसमें मेकअप, हेयर स्टाइल, ड्रेस, नेल पॉलिश व उनके रंग से जुड़ी हर चीज शामिल होती है।
मॉडल
लाइव मॉडलिंग के अलावा एक मॉडल पत्र/पत्रिकाओं, कैटलॉग, विज्ञापनों के लिए काम कर सकता है। खूबसूरत चेहरा, आकर्षक शरीर, सुंदर कद-काठी व आत्मविश्वास से लबरेज युवक-युवतियां इसमें करियर बना सकते हैं। फैशन शो, टीवी-प्रिंट में कपड़े व ज्वेलरी का प्रदर्शन इन्हीं मॉडलों द्वारा कराया जाता है।
फैशन कंसलटेंट
एक फैशन कंसलटेंट को फैशन ट्रेंड और उसमें आने वाले बदलाव के साथ फैशन डिजाइनिंग की भी जानकारी होनी चाहिए। नए प्रोडक्टस डेवलप करने के लिए फैशन कंसलटेंट को नए प्रयोग व नए विचार पेश करने होते हैं और बदलते फैशन परिवेश की जानकारी रखनी होती है।
जुनून है जरूरी
अंजू मोदी, (फैशन डिजाइनर)
फैशन एक रचनात्मक फील्ड है। इसमें तुक्के से काम नहीं चल सकता। यदि किसी को कामयाब फैशन डिजाइनर बनना है तो उसमें इसके प्रति जुनून होना चाहिए। किसी बेहतर संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया होना चाहिए। फैशन की दुनिया में किस किस्म की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जा रही है, यदि उसकी ठीक-ठीक समझ नहीं है तो काम करना मुश्किल हो जाएगा। यह भी बहुत जरूरी है कि प्रशिक्षण किसी अच्छे इंस्टीटय़ूट से ही लिया जाए। आज सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ग्लैमर से प्रभावित होकर लोग इसमें आ रहे हैं। परिणाम यह हो रहा है कि थोड़े ही समय में उन्हें अपनी कमी का अहसास होने लगता है और या तो वे इंडस्ट्री को छोड़ कर चले जाते हैं या फिर डिप्रेस हो जाते हैं।
अगर किसी को लगता है कि पेज-3 में फोटो छपवाना या रैंप पर चलना ही फैशन है तो इस गलतफहमी को दूर कर लेना ही बेहतर है। जो भी फैशन इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना चाहता है, उसमें लगन और प्रैक्टिकल नॉलेज होनी चाहिए, खोज और रिसर्च की तरफ ध्यान होना चाहिए। यह एक सीरियस प्रोफेशन है और जो लोग पूरी गंभीरता के साथ इसमें उतरते हैं, वे जरूर कामयाब होते हैं।
करियर फैक्ट्स
कोर्स
फैशन डिजाइनिंग एक प्रोफेशनल कोर्स है, जो 12वीं के बाद किया जा सकता है। इसके तहत अपेरल डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग, प्रोडक्शन मैनेजमेंट, क्लोदिंग टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल साइंस, अपेरल कंस्ट्रक्शन मेथड, फैब्रिक डाइंग एवं प्रिंटिंग, कलर मिक्सिंग एवं कंप्यूटर एडेड डिजाइन आदि क्षेत्रों में से किसी एक का चुनाव कर सकते हैं। इसमें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा, फाउंडेशन डिग्री, डिग्री और पीजी डिग्री तक कोर्स उपलब्ध हैं।
योग्यता
अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए किसी भी स्ट्रीम से 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास होना अनिवार्य है। साथ ही एडमिशन के लिए लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू से गुजरना पड़ता है। वहीं पीजी में एडमिशन के लिए स्नातक होना जरूरी है।
अवसर
करियर के लिहाज से यह एक बेहतरीन फील्ड है। इसमें ग्लैमर के साथ नाम और दाम भी है। विभिन्न एक्सपोर्ट हाउसों, गारमेंट स्टोर चेन, बुटीक्स, लेदर कंपनियों, ज्वेलरी हाउसों, फैशन शो ऑर्गेनाइजेशन्स, टीवी/फिल्म में काम कर सकते हैं। कुछ अनुभव जुटा लेने के बाद अपना काम शुरू किया जा सकता है।
वेतन
ट्रेनी के तौर पर वेतन 10 से 12 हजार तक मिलता है। जैसे ही वह अनुभव हासिल करता है, सैलरी में इजाफा होता चला जाता है। एकाध साल में ही उसकी कमाई 30 से 35 हजार तक होने लगती है। अगर आपकी मकबूलियत अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गई तो समझो वारे-न्यारे हो गए।
प्रमुख संस्थान
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट)
निफ्ट कैम्पस, हौज खास, गुलमोहर पार्क के पास, नई दिल्ली-16
वेबसाइट- www.nift.ac.in
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ डिजाइन,
पालडी, अहमदाबाद,
वेबसाइट- www.nid.edu
इंटरनेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, साउथ एक्सटेंशन,
पार्ट-1, नई दिल्ली-49
वेबसाइट- www.iiftindia.net
पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन
ए-21/13, नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-2, नई दिल्ली-28
वेबसाइट- www.pearlacademy.com
एपीजे इंस्टीटय़ूट ऑफ डिजाइन,
54, तुगलकाबाद इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली-62
वेबसाइट- www.apeejay.edu
एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नोएडा
वेबसाइट- www.amity.edu/asft
(फजले गुफरान,हिंदुस्तान,दिल्ली,29.9.2010)
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