अमेरिका के आईवी लीग की तर्ज पर भारत में नवरत्न केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाएंगे। आईवी लीग में येल और हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी भी शामिल हैं। बुधवार को मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में हुई कुलपतियों की बैठक में गुणवत्ता का अंतरराष्ट्रीय स्तर हासिल करने के लिए नवरत्न विश्वविद्यालय बनाए जाने पर सैद्धांतिक सहमति बनी। इन विश्वविद्यालयों को ज्यादा वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता दी जाएगी। कोर कमेटी इन विश्वविद्यालयों के संबंध में दो माह में रिपोर्ट सौंपेगी।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए नया फार्मूला अगले सत्र से
इसके अलावा इंजीनियरिंग की तर्ज पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी प्रवेश के लिए बारहवीं कक्षा के नतीजों पर वेटेज के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा प्रवेश परीक्षा (एप्टीट्यूड टेस्ट) आयोजित करने की तैयारी है। सिब्बल ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए साझा प्रवेश परीक्षा का औचित्य गिनाते हुए कहा कि बारहवीं कक्षा के नतीजों पर वेटेज का फार्मूला स्कूली पढ़ाई की उपेक्षा नहीं करने के रूप में सामने आएगा जबकि एप्टीट्यूड टेस्ट उनके व्यक्तित्व को निखारने में मददगार बनेगा। यह फार्मूला स्नातक स्तर पर ही लागू होगा।
वहीं, पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर प्रवेश के लिए ग्रेजुएट के नतीजे पर वेटेज के अलावा चुनिंदा विषयों में एप्टीट्यूड टेस्ट के फार्मूले पर सहमति बनी यानी नियमों में थोड़ा ढील। जिन अन्य महत्वपूर्ण मसलों पर एक राय बनी उनमें बीए बीएड और बीएससी बीएड का चार वर्षीय कोर्स, अकादमी प्रबंधन प्रोग्राम, विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए आचार संहिता, शिक्षकों की टे्रनिंग, फैकल्टी का आदान-प्रदान, क्रेडिट ट्रांसफर मुख्य हैं। मंत्रालय का इरादा सुधारों के नए फ्रेमवर्क को अगले अकादमी सत्र से लागू करने का है। इसके लिए भी कोर कमेटी से दो माह में रिपोर्ट मांगी गई है।
बीए-बीएड और बीएससी-बीएड
कुशल शिक्षक तैयार करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए चुनिंदा विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय कोर्स शुरू होंगे। इसके तहत तीन साल की बीए अथवा बीएससी करने के बाद छात्र एक साल का बीएड कर सकेंगे। कॉमर्स को इससे अलग रखा गया है।
आचार संहिता
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए अलग आचार संहिता बनेगी जिसमें स्टाफ, फैकल्टी से लेकर अनुशासन तक के मसले शामिल होंगे। इसके अलावा एमबीए की तर्ज पर अकादमी मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा ताकि प्रशासनिक स्टाफ अपने काम में दक्ष बन सके।
शिक्षकों का आदान-प्रदान
सभी विवि आपस में फैकल्टी का आदान प्रदान कर सकेंगे और सेवा के दौरान शिक्षकों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था होगी। सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के जरिए द्विपक्षीय क्रेडिट ट्रांसफर पर भी एक राय बनी है।
विवि की संपत्ति का अधिकतम उपयोग
समाज और उद्योग के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर तय हुआ कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की अकादमिक और अचल संपत्ति का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत परिसर में वोकेशनल ट्रेनिंग, कौशल विकास केंद्र चलाने की इजाजत दी जा सकेगी(अमर उजाला,दिल्ली,30.9.2010)।
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