स्टूडेंट्स को समय पर रिजल्ट देने के लिए राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी में शीघ्र ही ऑनलाइन रिजल्ट तैयार होगा। इसके लिए आरटीयू व नेशनल इंफरेमेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे।
जिससे परीक्षा विभाग में छात्रों के अंक ऑनलाइन मिल सकेंगे और उनकी मार्कशीट भी ऑनलाइन तैयार होगी। आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी से हजारों छात्रों को इंजीनियरिंग की सेमेस्टर परीक्षाओं के रिजल्ट समय पर नहीं मिल पा रहे हैं।
राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) में साल में दो बार सेमेस्टर परीक्षाओं का रिजल्ट तैयार करने के लिए राज्य की निजी आउटसोर्सिंग—कंपनी को नियमानुसार सालाना ठेका दिया जाता है। राज्य में सिर्फ 3 आउटसोर्सिंग एजेंसी होने से वे मनमानी कर रही हैं।
विवि के सूत्रों ने बताया कि ये कंपनियां कम रेट पर ठेका ले लेती है और आरटीयू के प्रमाणपत्र का लाभ उठाकर दूसरे विवि में भी ठेका ले लेती हैं। फिर मनमानी करते हुए निर्धारित समय पर छात्रों के रिजल्ट का डाटा कंप्यूटर में फीड नहीं करती हैं।
परीक्षा नियंत्रक डॉ.अनिल के.माथुर ने बताया कि कंपनियों को समय पर कॉपियां देने के बावजूद वे रिजल्ट तैयार नहीं कर पा रही है, दोषी आउटसोसिर्ंग कंपनी से पैनल्टी वसूल की जा रही है, लेकिन इससे छात्रों का रिजल्ट तो प्रभावित हो रहा है।
20 के स्टाफ से डेढ़ लाख छात्रों की परीक्षा की तैयारी
राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) में 4 साल में छात्रों की संख्या बढ़कर डेढ़ लाख से ज्यादा हो गई, लेकिन परीक्षा विभाग की जिम्मेदारी 20 जनों के स्टाफ के पास ही हैं। इनके अलावा 6 हजार रुपए मासिक अनुबंध पर 10 डाटा एंट्री ऑपरेटर काम रहे हैं।
गोपनीय शाखा में भी स्टाफ की कमी है, जहां ठेके के कर्मचारी नहीं लगाए जा सकते। आरटीयू से संबद्ध 150 इंजीनियरिंग, 142 एमबीए और 35 एमसीए कॉलेजों के डेढ़ लाख छात्र साल में दो बार सेमेस्टर परीक्षा देते हैं, उनकी मुख्य व बेक परीक्षा और रिवेल का रिजल्ट घोषित करना विवि के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।
2006 में बीटेक प्रथम सेमेस्टर में 17 हजार स्टूडेंट थे, जो अब बढ़कर 50 हजार हो गए हैं। राज्य की शेष यूनिवर्सिटी में एनुअल स्कीम से परीक्षाएं होती हैं, जबकि आरटीयू में चारों संकाय में साल में दो बार सेमेस्टर परीक्षाएं होने से रिजल्ट समय पर देने का दबाव बना रहता है।
150 पदों की जरुरत
राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर में 225 का स्टाफ है, जबकि आरटीयू के परीक्षा विभाग में इसका 10 फीसदी ही स्टाफ है। यहां 2 हजार छात्रों पर एक क्लर्क के फार्मूले के अनुसार कम से कम 150 पदों की
आवश्यकता है।
प्रक्रिया चल रही है
विवि में मैनपावर की जबर्दस्त कमी है, आउटसोर्सिंग कंपनी के स्थान पर एनआईसी से रिजल्ट तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही है। रिजल्ट समय पर घोषित करना पहली प्राथमिकता है।
प्रो. आरपी यादव, कुलपति, आरटीयू(दैनिक भास्कर,कोटा,29.9.2010)
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