30 सितंबर 2010

इग्नूःपाक कला में करें एमबीए से लेकर पीएचडी तक

जहाजी कोरमा हो, केरल का पुप्तु काडला, महाराष्ट्र का पुरान पोली हो या मणिपुर का इरोमा, इन सभी भारतीय व्यंजनों को पढ़ने और पकाने का मौका आने वाले दिनों में एक ही सेंटर में मिलेगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय इसके लिए कलीनरी सेंटर, यानी पाकशाला संस्थान खोल रहा है । सेंटर में भारत के क्षेत्रीय भोजनों में रुचि रखने वाले को सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर एमबीए और पीएचडी करने का भी मौका मिलेगा। रेगुलर कक्षाओं के साथ कराए जाने वाला यह कोर्स विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी सर्विस मैनेजमेंट का हिस्सा होगा।

कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया अगले सेशन से शुरू की जाएगी। इसकी विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है । विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और विद्वत् परिषद ने इस योजना को पिछले दिनों स्वीकृति प्रदान की है ।

कोर्स का मकसद
पाकशाला से जुड़ा सेंटर खोलने का मकसद भारतीय पाक विज्ञान और खासकर यहां के क्षेत्रीय भोजन व व्यंजनों को तैयार करने, उसे संरक्षण प्रदान करने से लेकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका विकास करना है । अपने स्वाद में अनूठे और लाजवाब इन व्यंजनों को देश-विदेश के होटल, रेस्तरां और टूरिज्म सेंटर में लोकप्रिय बनाना है । कोर्स में भारत के क्षेत्रीय व्यंजनों का विदेशी व्यंजनों से तुलना का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। छात्रों को चीन, फ्रेंच और स्वीडिश आदि व्यंजनों से तुलनात्मक अध्ययन करना होगा।

विशेषज्ञ की राय
इग्नू के कु लपति प्रो राजशेखरन पिल्लई के मुताबिक, भारत विविधताओं का देश है । हरेक राज्य और क्षेत्र का अपना अनूठा और खास व्यंजन है । उसे पकाने की अलग-अलग शैली है । ये व्यंजन समय के साथ धीरे -धीरे विलुप्त से हो रहे हैं । उनका मूल स्वाद भी गायब या बदलता जा रहा है । भारत के इन क्षेत्रीय व्यंजनों और उनसे जुड़ी शैली का अध्ययन ही इस सेंटर में किया जाएगा। इसे तैयार करने का स्किल छात्रों को प्रदान किया जाएगा। व्यंजनों को तैयार करने और उसे संरक्षित रखने के लिए रिसर्च का काम भी होगा। भोजन के साथ-साथ उसके वैज्ञानिक , सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू का भी अध्ययन कि या जाएगा। इससे भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पाक या भोजन विशेषज्ञों को रूबरू कराया जाएगा।

कोर्स के रंग
पाककला में दक्षता प्रदान करने के लिए सर्टिफिकेट कोर्स से लेक र एमबीए और पीएचडी तक की डिग्री शामिल है। सर्टिफिकेट कोर्स सिर्फ आधारभूत जानकारी देने भर के लिए है । इसके बाद डिप्लोमा इन इंडियन कलीनरी आर्ट, बैचलर इन इंडियन कलीनरी आर्ट, एमबीए विद कलीनरी आर्ट और पीएचडी का कोर्स है । पाठ्यक्र म को अंतिम रूप दिया जा रहा है । ये सभी फुल टाइम कोर्स हैं । इसकी क क्षाएं भी इग्नू सेंटर में होंगी। दाखिले की प्रक्रिया और उसकी नियमावली की घोषणा जल्द ही की जाएगी।

फैकल्टी भी
खास कोर्स को पढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की टीम तैयार की जाएगी। ये विशेषज्ञ देशभर में विभिन्न क्षेत्रों में स्थित रेस्तरां में काम करने वाले शेफ और मैनेजर होंगे। व्यंजन विशेषज्ञ को भी सेंटर में पाककला की जानकारी देने के लिए बुलाया जाएगा। तुलनात्मक अध्ययन के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों से करार किया गया है। इसमें स्वीडिश यूनिवर्सिटी, चाल्र्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और इंस्टीट्यूट फॉर फूड एंड टेक्नोलॉजी है । इन विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ समय-समय पर विदेशी भोजन कला से परिचित कराएंगे, उसकी खासियत से रूबरू कराएंगे(प्रियंका कुमारी,हिंदु्स्तान,पटना,29.9.2010)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।