माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में तीन दिन से जारी गतिरोध समापन की ओर है। राज्य महिला आयोग ने कार्यस्थल प्रताड़ना के मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि के विभागाध्यक्ष पीपी सिंह को उनके पद पर 13 सितंबर से पूर्व की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दिए।
राज्य महिला आयोग की विशेष बैंच में व्याख्याता डॉ. ज्योति वर्मा की शिकायत पर सुनवाई की गई। आयोग ने इस संबंध में विवि के कुलपति , कुल सचिव और पद से हटाए गए विभागाध्यक्ष को तलब किया था। विवि के कुलसचिव द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत न करने और विभागाध्यक्ष द्वारा दस्तावेज विभाग को भेजने की तिथि का साक्ष्य पेश करने के बाद आयोग ने यह निर्णय दिया। मामले की सुनवाई आयोग की अध्यक्ष कृष्णकाता तोमर, सदस्य डा. कमला वाडिया और उपमा राय की।
सुनवाई के दौरान आयोग के सवालों का कुलसचिव संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। आयोग ने व्याख्याता ज्योति वर्मा की वेतन वृद्धि और फीड बैक फार्म और वर्क रिपोर्ट की जानकारी मागी जो प्रस्तुत नहीं कर सके। सवाल जवाब के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि ज्योति वर्मा की संविदा नियुक्ति नियम विरूद्ध की गई थी। आयोग द्वारा विभागाध्यक्ष को हटाए जाने का कारण भी पूछा गया,लेकिन कुलसचिव का भी समाधानकारी जवाब नहीं दे पाए। सुनवाई के दौरान विभागाध्यक्ष पीपी सिंह ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में उन्हें अनावश्यक दोषी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि वेतन वृद्धि संबंधी निर्णय लेने का अधिकार केवल कुलपति को है यही नहीं उन्होंने वर्क रिपोर्ट और फीड बैक फार्म कुल सचिव को संबंध तिथि में देने के प्रमाण प्रस्तुत किए। आयोग ने विवि के कुल सचिव को पत्रकारिता विभागाध्यक्ष पीपी सिंह को 13 सितंबर से पूर्व की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दिए(जागरण,29.9.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।