नगर निकायों को सफाई-स्वच्छता बनाए रखने की परीक्षा में बेहतर अंक हासिल करने पर पुरस्कृत किया जाएगा। इसके लिए निकायों को सीएम निर्मल पुरस्कार योजना के तहत होने वाला 200 नंबर का पेपर पास करना होगा। पुरस्कार में मिलने वाली धनराशि को सफाई कार्यक्रमों पर खर्च करने की अनिवार्यता होगी और इसकी दस प्रतिशत धनराशि को बेहतर काम करने वाले अफसरों-कर्मचारियों में भी वितरित किया जाएगा। राज्य में लोगों को स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सीएम निर्मल नगर पुरस्कार योजना लागू की गई है। योजना कई पहलुओं से रुचिकर है। दरअसल अलग-अलग कैटेगरी में प्रदर्शन के आधार पर निकायों को नंबर मिलने हैं। इसमें निकायों का अपशिष्ट प्रबंधन, सेनिटेशन प्लान, सफाई व्यवस्था, स्वच्छता व जनजागरूकता, शौचालयों से आच्छादित घर, अपशिष्ट एकीकरण, स्वच्छता समितियां, प्लास्टिक पर रोक, कूड़े का पृथक्कीकरण, कूड़े की रिसाइक्लिंग, मलिन बस्तियों में सफाई तथा सफाई संबंधी शिकायतों के निवारण पर नंबर दिए जाने हैं। आठ केटेगरी के लिए अधिकतम दस, चार केटेगरी के लिए अधिकतम बीस तथा एक केटेगरी के लिए अधिकतम चालीस नंबर तय किए गए हैं। कुल मिलाकर 200 नंबर की यह परीक्षा होगी। सफाई व स्वच्छता की इस परीक्षा में उसी निकाय को पास माना जाएगा, जिसे पचास प्रतिशत अंक प्राप्त होंगे। पुरस्कार के लिए दो केटेगरी बनाई गई है। पहली केटेगरी में नगर निगम व नगर पालिकाएं शामिल हैं। इस केटेगरी में प्रथम आने वाले निकाय को पचास लाख, द्वितीय स्थान के लिए 25 लाख व तृतीय स्थान के लिए दस लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। नगर पंचायतों की अलग केटेगरी होगी। इसमें प्रथम को 25 लाख, द्वितीय को 20 लाख और तृतीय को दस लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा। पुरस्कार राशि का नब्बे प्रतिशत सफाई कार्यक्रमों में खर्च करना होगा। शेष दस प्रतिशत राशि को कर्मचारियों व अधिकारियों में बतौर पुरस्कार वितरित किया जाएगा। हर वर्ष 30 सितंबर की तिथि प्रतियोगिता के लिए कट-आफ-डेट रहेगी। प्रतियोगिता में शामिल होने वाले निकाय को जिलाधिकारी के जरिए आवेदन शहरी विकास निदेशक को भेजना होगा। इसके बाद शहरी विकास विभाग की टीम अलग-अलग केटेगरी में संबंधित निकाय का मूल्यांकन करेगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टिप्पणी, शुष्क शौचालय प्रमाण पत्र, सफाई की नियमित समीक्षा, ट्रेचिंग ग्राउंड की व्यवस्था, ड्रेनेज सिस्टम आदि पर भी निकाय के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा(दैनिक जागरण,देहरादून,30.09.2010)।
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