योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा है कि जो देश कभी आध्यात्मिक शक्ति व नैतिक मूल्यों के लिए जाना जाता था,आज उसकी पहचान बन गई है गंदगी, भूख और भ्रष्टाचार। भ्रष्टाचार का यह आलम है कि कॉमनवेल्थ खेल के आयोजन के नाम पर पैसे कमाने का खेल खेला गया। जितना पैसा इनके आयोजन पर खर्च किया गया है उतना पैसा विश्वविद्यालयों की स्थापना पर खर्च किया जाता तो एक हजार नए विश्वविद्यालय खोले जा सकते थे। जहां पढ़कर बच्चे न सिर्फ विद्वान बनते बल्कि रोजगार भी पाते। बाबा खरखौदा में सोमवार को आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। जहां उन्हें सुनने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।
कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन के अवसर पर ब्रिटेन की महारानी के संदेश का पाठ हमारी मानसिक गुलामी का प्रतीक ठहराते हुए बाबा बोले, किसी भी देश का विकास कृषि, उद्योग, सेवाओं व प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। कभी सेज व कभी अन्य योजनाओं की आड़ में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है जिससे कृषि क्षेत्र लगातार घट रहा है। कृषि क्षेत्र की बढ़ती लागत ने भी किसान की कमर तोड़ रखी है। कृषि क्षेत्र को न तो पर्याप्त बिजली दी जा रही है और न ही पानी। उद्योग क्षेत्र पर चंद बड़े औद्योगिक घरानों और विदेशी कंपनियों का प्रभुत्व है। विदेशी भाषा को जरूरत से ज्यादा महत्व दिए जाने के कारण सेवाओं में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की भागीदारी नगण्य है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश की व्यवस्था सुधरनी चाहिए उसी तरह शरीर की व्यवस्था भी सुधार मांगती है। योग ही एकमात्र उपाय है जो शरीर की अंत: प्रज्ञा को जागृत कर मानव को महामानव बना सकता है। इन दिनों रोटी पर, बेटी पर, खेत पर व देश पर खतरा मंडरा रहा है। कई चुनौतियां हैं जिनका सामना करना है(नवभारत टाइम्स,सोनीपत,5.10.2010)।
इस बाबा का गणित 'सधुक्कड़ी गणित' है. हर राशि को गांवों की संख्या से भाग दे देता है ये बाबा. किसी चेले की न तो ये सुनता है न ही किसी चेले में दम है कि इसे छाती ठोक के बताए कि सेना, पुलिस, प्रसाशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी जैसे जैसे दूसरे भी बहुत से ख़र्चे होते हैं देश चलाने में जिन्हें बंद करके सालाना बजट के दस लाख करोड़ को गांवों की संख्या से भाग नहीं दिया जा सकता.
जवाब देंहटाएंअगर इस बाबा का अर्थशास्त्र इस देश में लागू हो गया तो लोग कुटिया में रहेंगे और इसके जैसे साधू इसी जैसे महलों में.
बाबा जी को योग पर ध्यान देना चाहिये, लोगों को जगाना भी ठीक है पर योग की आड़ में सत्ता की लपलपाहट टपकी पड़ती है इनकी ज़ुबान से अब तो. अरे भई लोगों पर इतना ही भरोसा है तो लोगों को ही सही फ़ैसले करने लायक बना दो न, काहे अपना सन्यास ख़राब करते हो बाबा राजनीतिबाजी करके.