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05 अक्टूबर 2010

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालयःकालेज में फेल, विवि चार्ट में पास और बन गये असिस्टेंट रजिस्ट्रार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़े का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। अभिलेख में हेराफेरी और फर्जीवाड़े के आरोप में पूर्व रिकार्ड रूम के प्रभारी मुस्तफा अंसारी के निलंबन का मामला सुर्खियों में रहा तो सहायक कुलसचिव प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात श्याम सुन्दर के फर्जी अंकपत्र की शिकायत से परिसर एक बार फिर गरमा गया है। कुलाधिपति के विशेष सचिव एम. देवराज को सम्बोधित पत्र में शिकायतकर्ता ने श्याम सुन्दर के वर्ष 1973 में शिवपति महाविद्यालय शोहरतगढ़ बस्ती के चार्ट में स्नातक अनुत्तीर्ण एवं यूएफएम तथा विश्र्वविद्यालय चार्ट में उत्तीर्ण अंक का डाटा मुहैया कराकर श्याम सुन्दर के फर्जीवाड़े की जांच कराकर तत्काल निलंबन एवं कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है। गंभीर बात यह है कि श्याम सुन्दर गोपनीय विभाग में लगभग एक दशक तक बतौर वरिष्ठ सहायक कार्य किये हैं। यूं कहें खुद फर्जी व दागी होते हुए असली प्रमाणपत्र जारी करने वाले विभाग में कार्य किये हैं। इत्तेफाक ही है कि कुछ गिने-चुने ऐसे मामलों का खुलासा हो जाता है। न जाने कितने ऐसे फर्जी कारनामे अभिलेख विभाग, गोपनीय विभाग और विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से काल-कलवित हो जाते हैं। विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं आल इण्डिया यूनिवर्सिटी इम्प्लाइज कन्फेडरेशन के उपाध्यक्ष ब्रजभूषण मिश्र ने 23 सितम्बर 2010 को कुलाधिपति के विशेष सचिव एम. देवराज को एक पत्र लिखा है। पत्र में विश्वविद्यालय के कुलसचिव ए.एम. अंसारी पर स्वहित में शासनादेशों का उल्लंघन कर विश्र्वविद्यालय एवं शासन तथा समाज हित के विरुद्ध कार्य करने और पूर्वाचल के गौरवसम्पन्न विश्वविद्यालय की अस्मिता के साथ मजाक करने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने पत्र में दो बिन्दुओं का उल्लेख किया है, जिसमें ए.एम. अंसारी द्वारा अपने पद के दायित्वों का निर्वहन न कर शासन व प्रशासन के आदेशों की अवहेलना, लगातार असत्य कथन व सक्षम अधिकारियों को गुमराह कर साजिश के तौर पर विश्वविद्यालय हित के विपरीत कार्य करना, जिससे उनके कृत्यों से विश्वविद्यालय में अराजकता एवं अस्थिरता का माहौल व्याप्त होने का उल्लेख है। वहीं दूसरे बिन्दु में कुलसचिव पर खुलकर श्याम सुन्दर की तरफदारी कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का जिक्र है। यह भी लिखा है कि श्याम सुन्दर जो तकरीबन एक दशक तक गोपनीय विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्य किये हैं वह स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं हैं और फर्जी अंकपत्र के आधार पर विश्वविद्यालय में कार्यालय अधीक्षक के पद पर सेवारत हैं। यही नहीं श्री अंसारी द्वारा इनसे सहायक कुलसचिव प्रशासन का कार्य लिया जा रहा है। संभव है कि विश्वविद्यालय के सारणीयन पंजिका में हेरफेर किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह उल्लेख किया है कि श्याम सुन्दर वर्ष 1973 में जिस महाविद्यालय से स्नातक किये हैं, वहां के चार्ट में आज भी राजनीति विज्ञान प्रथम प्रश्नपत्र में यूएफएम और द्वितीय प्रश्नपत्र में 15 अंक तथा भूगोल प्रथम प्रश्नपत्र में 14 और द्वितीय में 15 अंक के साथ परीक्षाफल अनुत्तीर्ण है। वहीं विश्वविद्यालय अभिलेखागार में मौजूद चार्ट में श्याम सुन्दर राजनीति विज्ञान प्रथम प्रश्नपत्र में 40 और द्वितीय में 25 तथा भूगोल प्रथम प्रश्न पत्र में 24 और द्वितीय में 15 अंक के साथ परीक्षाफल उत्तीर्ण हैं। हिन्दी विषय में विश्वविद्यालय और कालेज दोनों चार्ट में प्रथम प्रश्नपत्र में 33 और द्वितीय में 22 अंक मिला है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि श्याम सुन्दर कालेज के चार्ट के अनुसार फेल हैं और उनका अंकपत्र फर्जी है। शिकायतकर्ता का आरोप यह भी है कि कुलसचिव अंसारी द्वारा श्याम सुन्दर का बचाव करते हुए उन्हें महत्वपूर्ण पद पर बिठाना यह प्रमाणित करता है कि विश्र्वविद्यालय के फर्जी अंकपत्र के धंधे को कुलसचिव का संरक्षण प्राप्त है। कर्मचारी नेता ने फर्जीवाड़े सम्बंधी शिकायती पत्र प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और ब्यूरोक्रेट कुलपति पी.के. महांति को भी मुहैया करायी है। फिलहाल पूर्व में कर्मचारी संघ के अध्यक्ष की शिकायतों पर पूर्व कुलपति एस.एल. मलिक द्वारा गठित विश्वविद्यालय विधि विभाग के अधिष्ठाता प्रो. अरविन्द कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली कमेटी इस प्रकरण की जांच कर रही है(दैनिक जागरण,गोरखपुर,5.10.2010)।

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