जबलपुर हाईकोर्ट ने एक राहतकारी आदेश के जरिए प्रदेश के एक सौ पचास मेडिकल छात्रों की डिग्रियों पर मान्यता की मोहर लगा दी। मामला राजधानी भोपाल स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में वर्ष २००५ में दाखिला लेने वाले एमबीबीएस छात्रों से संबंधित है। जस्टिस केके लाहोटी व जस्टिस श्रीमती विमला जैन की युगलपीठ के द्वारा पारित आदेश के साथ ही छात्रों को बरकतुल्ला विश्वविद्यालय भोपाल से मिलने वाली डिग्री मान्य हो गई है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को पीपुलस मेडिकल कॉलेज एंड मेडिकल साइंस भोपाल की याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि भारत सरकार कॉलेज की मान्य हो चुकी एमबीबीएस डिग्री का राजपत्र में प्रकाशन (गजटेड नोटिफिकेशन) कराए। साथ ही कॉलेज-कोड का विधिवत आवंटन भी किया जाए, ताकि कॉलेज से एमबीबीएस कर चुके छात्र स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए प्रीपीजी की परीक्षा में शामिल हो सकें। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एपी श्रोती ने अवगत कराया कि २३ सितम्बर २०१० को कोर्ट ने कॉलेज को रिकगनाइज कर दिए जाने के संबंध में वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के निर्देश केंद्र सरकार के अधिवक्ता मोहन सोंसरकर को दिए थे। निर्देशानुसार भारत सरकार को ३० सितम्बर से पूर्व यह जानकारी पेश करनी थी। जिसके पालन में ३० सितम्बर को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सोंसरकर ने कोर्ट को बताया कि कॉलेज की डिग्री के रिकगनाइजेशन के संबंध में पहले ही फॉर्मल नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है।
लिहाजा, पांच साल से संचालित प्रॉपर इस्टेब्लिशमेंट की शर्त पूरी करने वाले कॉलेज के छात्रों को मिलने वाली डिग्री मान्य होगी। यहां से निकलने वाले छात्र स्नातकोत्तर कोर्स में दाखिला भी ले सकेंगे(नई दुनिया,दिल्ली,1.10.2010)।
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