05 अक्टूबर 2010

यूपीः3000 टॉप रैंकर्स का बी.एड. आवंटन रद्द

अभिषेक सिंह को संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा में प्रदेश में पांचवा स्थान मिला था। उन्हें केएन राजकीय परास्नातक विद्यालय, ज्ञानपुर भदोही में प्रवेश दिया गया था। अभिषेक पिछले डेढ़ माह से कालेज में कक्षाएं कर रहे हैं। अचानक उनका प्रवेश निरस्त कर दिया गया। दूसरी काउंसिलिंग के बाद जारी सूची में अभिषेक की सीट किसी और छात्र को आवंटित कर दी गई। यह सिर्फ अभिषेक के साथ ही नहीं हुआ। इलाहाबाद के हंडिया पीजी कालेज समेत प्रदेश के विभिन्न कालेजों के तीन हजार से अधिक छात्रों को पहली काउंसिलिंग में आवंटित सीट निरस्त कर दी गई है। इनमें से अधिकांश छात्र प्रवेश परीक्षा के रैंकर्स रहे हैं। मामले की जानकारी के बाद से उच्च शिक्षा विभाग में हड़कंप है। विभाग अब इसमें एनआईसी की गड़बड़ी बता रहा है।

ठीक की जाएगी गड़बड़ी :
उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. मियां जान के अनुसार छात्रों के साथ हुई गड़बड़ी दुरुस्त की जाएगी। रैंकर्स को आवंटित सीट पर दूसरी काउंसिलिंग में हुए नए आवंटन निरस्त किए जाएंगे।

उधर,प्रवेश निरस्त किये जाने के विरोध में सोमवार को बीएड अभ्यर्थियों ने लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि)में हंगामा किया। विद्यार्थियों ने कुलपति से मिलकर अपनी बात रखनी चाही लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। आक्रोशित विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय के बाहर काफी देर तक प्रदर्शन किया। किसी अधिकारी ने उनकी बात सुनना तक मुनासिब नहीं समझा। आखिर में विद्यार्थी कोर्ट जाने की बात कहकर वहां से चले गए। गौरतलब है कि बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में मेरिट सूची में शामिल सैकड़ों विद्यार्थियों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया है। लविवि अधिकारियों का तर्क है कि विद्यार्थियों ने फीस कन्फर्मेशन की रसीद नहीं ली थी। वहीं विद्यार्थियों का कहना है कि काउंसिलिंग केन्द्र पर रसीद न होने पर वहां मौजूद प्रभारी ने आवंटन पत्र ही पर्याप्त बताया था। इसी के आधार पर उन्हें कॉलेज मिल गया और छात्रों ने पढ़ाई शुरू कर दी। अभी तक सामने आए सैकड़ों विद्यार्थियों में अधिकतर 3 अगस्त (पहले दिन) की काउंसिलिंग के हैं। इस दिन सर्वर की समस्या से काउंसिलिंग प्रभावित भी हुई थी। लविवि प्रशासन ने बिना सोच विचार के प्रवेश निरस्त कर दिये लेकिन अब यह निर्णय अधिकारियों की गले की फांस बन गया है। प्रवेश निरस्त होने से विद्यार्थी परेशान हैं, उधर नये प्रवेशित विद्यार्थियों को कॉलेज प्रवेश नहीं दे रहे। दोनों समस्याओं में फंसे विद्यार्थी रोज लविवि अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन समस्या का निस्तारण होना तो दूर, कोई आश्वासन देने वाला भी नहीं मिल रहा है। लविवि प्रवक्ता प्रो.एसके द्विवेदी का कहना है कि विवि प्रशासन विद्यार्थियों का अहित नहीं चाहता है। इस सम्बंध में कुलपति से बात कर समस्या का हल निकाला जाएगा(दैनिक जागरण,इलाहाबाद/लखनऊ,5.10.2010)।

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