04 अक्टूबर 2010

अब विज्ञान और कला के साथ बीएड की पढ़ाई

देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में बीए और बीएससी के साथ बीएड के चार वर्षीय पाठ्यक्रम के प्रस्ताव को इनकी अकादमिक परिषद की मंजूरी मिलने पर जुलाई २०११ से उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में बीए-बीएड या बीएससी-बीएड कोर्स शुरू हो सकते है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के कुलपति प्रो.वीएन राजशेखरन पिल्लई ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में समिति की इस सिफारिश पर सहमति बनी है। इसके बाद कुछ प्रमुख विश्वविद्यालयों की अकादमिक परिषद की मंजूरी मिलने पर जुलाई २०११ से इस पर अमल करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों में इस बात पर सहमति बनी कि बीए के साथ बीएड और बीएससी के साथ बीएड का चार वर्षीय ३ प्लस १ पाठयक्रम पेश किया जाए। हालांकि बीकाम के साथ कोई बीएड कोर्स नहीं होगा। इस पाठयक्रम के बारे में सुझाव देने के लिए प्रो. पिल्लई के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया था और इस समिति ने हाल ही में मानव संसाधान विकास मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा कि देश के कुछ उच्च गुणवत्ता वाले कालेजों में बीए और बीएससी के साथ बीएड कोर्स शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके तहत छात्र तीन वर्षीय बीए या बीएससी पाठयक्रम के साथ एक अतिरिक्त वर्ष प़ढ़ाई कर बीएड कोर्स कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक समन्वित पाठ्यक्रम होगा जिसके माध्यम से छात्र बीए-बीएड या बीएससी-बीएड की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। पिल्लई ने कहा कि इस पाठयक्रम के लिए राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीइआरटी) पाठ्यसामग्री तैयार कर रहा है। कुछ क्षेत्रीय कालेजों में इस तरह के चार वर्षीय कोर्स पहले से ही चलाए जा रहे हैं(नई दुनिया,दिल्ली,4.10.2010)।

दैनिक जागरण की रिपोर्टः
देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों से अब बीए और बीएससी के साथ बीएड का चार वर्षीय पाठ्यक्रम भी किया जा सकेगा। अकादमिक परिषद से मंजूरी मिलने पर जुलाई 2011 से ऐसे पाठ्यक्रम शुरू हो सकते हैं। इग्नू के कुलपति प्रो. वीएन राजशेखरन पिल्लै ने कहा, मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में इस पर सहमति बनी है। इसके बाद कुछ चुनिंदा विश्वविद्यालयों की अकादमिक परिषद की मंजूरी मिलने पर जुलाई 2011 से इस पर अमल का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों में इस बात पर सहमति बनी कि बीए के साथ बी.एड. और बीएससी के साथ बीएड का चार वर्षीय पाठ्यक्रम पेश किया जाए। हालांकि बी.कॉम. के साथ बीएड नहीं होगा। इस पाठ्यक्रम के बारे में सुझाव देने के लिए प्रो. पिल्लै के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया था और इस समिति ने हाल ही में मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा, यह एक समन्वित पाठ्यक्रम होगा जिसके माध्यम से छात्र बीए-बीएड या बीएससी-बीएड की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। इस पाठ्यक्रम के लिए एनसीईआरटी पाठ्य सामग्री तैयार कर रहा है। कुछ क्षेत्रीय कॉलेजों में इस तरह के चार वर्षीय कोर्स पहले से ही चलाए जा रहे हैं। शिक्षकों की कमी पर इग्नू के कुलपति ने कहा, बीए और बीएससी पाठ्यक्रम चलाने वाली संस्थाओं में पहले से ही इस उद्देश्य के लिए शिक्षक हैं। हमारे आकलन में एक संस्थान में बीएड के लिए सात अतिरिक्त शिक्षकों की जरूरत होगी, जो कोई मुश्किल काम नहीं है। बैठक में इस पर भी सहमति बनी कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का आपस में आदान-प्रदान हो सकेगा। इसके अलावा इन विश्वविद्यालयों की परिसंपत्तियों का उपयोग व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यो के लिए किया जा सकेगा। बैठक में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में नवरत्न की एक श्रेणी तय करने पर भी सहमति बनी जो कड़े मानदंडों के अनुपालन के आधार पर तय होंगे, लेकिन जरूरी नहीं कि इनकी संख्या नौ हो।

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