फर्जी तरीके से एचबीटीआई में बीटेक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के आरोपी छात्रों का रिजल्ट रोक के बावजूद जारी कर दिया गया है। हड़कंप मचने के बाद अधिकारियों ने इंटरनेट से तुरंत परिणाम तो हटा लिया, लेकिन संस्थान से जुड़े लोग इस पूरी प्रक्रिया को किसी साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। एचबीटीआई प्रशासन ने कहा कि कानूनी राय लेने के बाद लापरवाही करने वाले दोषियों को काली सूची में डालने के साथ ही उन पर मुकदमा भी होगा।
राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा-2009 के जरिये एचबीटीआई कानपुर में कुछ छात्रों ने फर्जी तरीके से प्रवेश ले लिये थे। 'दैनिक जागरण' ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि प्रवेश परीक्षा में जो लोग शामिल हुए थे वे अभ्यर्थी नहीं थे। साथ ही प्रवेश पत्र पर फोटो और हस्ताक्षर भी बदले थे। प्रवेश पत्र और नामांकन पत्र के मिलान के दौरान एचबीटीआई में यह मामला पकड़ा गया। मामला उजागर होने पर यूपीटीयू के तत्कालीन कुलपति प्रो. प्रेमव्रत ने जांच समिति का गठन किया था। बाद में मामले की फोरेंसिक जांच की भी संस्तुति कर दी गयी थी। यूपीटीयू ने ग्यारह छात्रों को दोषी माना और 41 छात्रों के अभिलेख पुन: जांच के लिए मांगे। एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में सर्वसम्मति से एचबीटीआई प्रशासन ने निर्णय लेकर बीटेक प्रथम वर्ष के 52 छात्रों का परिणाम जांच पूरी होने तक के लिए रोक दिया। जबकि अन्य अभ्यर्थियों का परिणाम बीते एक अगस्त को घोषित कर दिया। इसके बाद एचबीटीआई प्रशासन ने विवि प्रशासन को पत्र लिखकर जांच जल्द पूरी करने का निवेदन किया, लेकिन जांच पूरी नहीं हुई। इस बीच 30 छात्रों ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। जिस पर छह अक्टूबर को सुनवाई होनी है, लेकिन नेट पर रिजल्ट घोषित होने के बाद जानकारों का मानना है कि कोर्ट में एचबीटीआई प्रशासन का पक्ष कमजोर होगा। वहीं परिणाम घोषित होते ही प्रथम वर्ष के छात्र प्रेम नारायण, अवध बिहारी, संदीप कुमार आदि ने रिजल्ट की प्रतिलिपि हासिल कर ली।
मालूम नहीं है कि कैसे रिजल्ट घोषित हो गया। रिजल्ट बनाने वाली एजेंसी को स्पष्ट लिखित निर्देश थे कि 52 छात्रों का रिजल्ट नेट पर नहीं डालना हैं।
-डीके सिंह, परीक्षा नियंत्रक
जांच बैठा दी गयी है, यह भी चेक कर रहे हैं कि रिजल्ट कैसे घोषित हो गया। एजेंसी की लापरवाही होगी तो न केवल उसे काली सूची में डाला जाएगा बल्कि मुकदमा भी होगा।
-नरेश कुमार, कुलसचिव
जीबीटीयू ने पंजीकरण निरस्त नहीं किया
एचबीटीआई के कुलसचिव बताते हैं कि ग्यारह छात्रों को जीबीटीयू दोषी मान चुका है लेकिन अभी तक दोषी छात्रों का पंजीकरण विवि ने निरस्त नहीं किया है। वह कहते हैं कि जीबीटीयू द्वारा कोई निर्णय न लेने से एचबीटीआई भी निर्णय न ले पाने पर मजबूर है। साथ ही छात्रों के बारे में विश्वविद्यालय द्वारा कोई निर्देश नहीं देने पर 34 छात्रों के अभिलेख संस्थान से जीबीटीयू भेजे जा चुके हैं(ओ.पी.वाजपेयी,दैनिक जागरण,कानपुर,2.10.2010)।
बहुत बढ़िया .
जवाब देंहटाएंकृपया इसे भी पढ़े -http://www.ashokbajaj.com/2010/10/blog-post_03.html