02 अक्टूबर 2010

पंजाबःईटीटी अध्यापकों की मांग मानने से साफ इनकार

ग्रामीण विकास एवं पंयायत विभाग ने ईटीटी टीचर्स यूनियन के दावे को खारिज करते हुए कहा कि पंचायती राज प्रणाली के अधीन चल रहे स्कूलों को शिक्षा विभाग को देने की बात एक भी पंचायत ने नहीं की। यूनियन का दावा गुमराह करने वाला है। इसलिए उनकी इस मांग को किसी भी कीमत पर नहीं माना जाएगा।

गत शुक्रवार को चंडीगढ़ में रोष रैली आयोजित कर ईटीटी यूनियन ने दावा किया था कि करीब 5160 पंचायतों ने प्रस्ताव पारित कर पंचायती राज प्रणाली के अधीन चल रहे स्कूलों को शिक्षा विभाग को देने की वकालत की है। विभाग के अनुसार, किसी भी ग्राम पंचायत ने एलीमेंटरी स्कूलों का नियंत्रण संभालने में बेबस होकर अपना स्कूल शिक्षा विभाग के हवाले करने के संबंध में ईटीटी अध्यापकों के पक्ष में कोई लिखित प्रस्ताव पास नहीं किया। विभागीय के प्रवक्ता ने कहा कि सभी क्षेत्रीय अधिकारियों से जाच कराने के बाद ईटीटी अध्यापकों का दावा खोखला निकला। किसी भी पंचायत के कार्यवाही रजिस्ट्रर में ऐसा एक भी पारित प्रस्ताव हुआ नहीं मिला। किसी साधारण कागज पर पंचायत सदस्य के हस्ताक्षरों को पंचायत का कार्यवाही प्रस्ताव नहीं करार दिया जा सकता और न ही इसकी पंचायती कानून के अनुसार कोई मान्यता है। इन अध्यापकों की इस मांग को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रवक्ता के अनुसार, सरकार ने रोष प्रदर्शन करने वाले ईटीटी अध्यापकों की इस दलील को भी निराधार करार दिया, जिसमें पंचायती राज प्रणाली के अधीन चल रहे स्कूलों को निजीकरण की तरफ बढ़ता कदम कहा गया है।

पंचायत विभाग का कहना है कि अपनी नियुक्ति के मौके इन अध्यापकों ने स्पष्ट सेवा शर्तो पर सहमति देकर नौकरी पत्रों पर हस्ताक्षर किए हुए है। इन लोगों को विभिन्न मौकों पर रियायतें दी गई हैं। अध्यापकों की तैनाती संबंधी जारी शर्तों में लिखित मद न होने के बावजूद सरकार और पंचायत विभाग ने इन्हें अधिक लाभ, अवकाश और भत्ते दिए है। सरकार ने ईटीटी अध्यापकों को नसीहत दी कि वे अपने दावे को त्याग कर लाखों ग्रामीण छात्रों के भविष्य से खेलना बंद करें(जागरण,चंडीगढ़,2.10.2010)।

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