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04 अक्टूबर 2010

एम्स में दाखिले और नियुक्तियों में आरक्षण के लिए प्रधानमंत्री से गुहार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एडमिशन के साथ-साथ नौकरियों में भी आरक्षण का पालन नहीं किया जा रहा है । इस बाबत फोरम फॉर राइट्स एंड इक्विटी की तरफ से प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को शिकायत की गई। इसके अनुसार एम्स फैकल्टी में जिन 192 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है, उसमें एससी/एसटी और ओबीसी के लिए सिर्फ 56 पद आरक्षित किए गए हैं, जो कि सिर्फ 27 फीसदी ही बैठता है जबकि 50 फीसदी पद आरक्षित श्रेणी के लिए होने चाहिए। शिकायत में कहा गया है कि एम्स में नियुक्तियों में रोस्टर प्रणाली का उल्लंघन किया जा रहा है। आरक्षण लागू नहीं करने के लिए कैडर को विभाजित किया जा रहा है , क्योंकि एकल कैडर के पदों पर आरक्षण लागू नहीं होता है । इसके अलावा जो आरक्षित सीटें खाली रह जाती हैं , उन्हें कैरी फारवर्ड नहीं किया जा रहा है । तीसरे, काफी संख्या में आरक्षित श्रेणी के लोगों को मैरिट के आधार पर नियुक्तियां मिल रही हैं, जिन्हें एम्स प्रशासन आरक्षण में गिन रहा है जबकि आरक्षण तभी मान्य होता है , जब उम्मीदवार ने किसी प्रकार की छूट सुविधा का लाभ उठाया हो। फोरम के अनुसार अभी प्रोफेसरों के जिन 192 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आरंभ की जा रही है , उनमें से 136 सामान्य श्रेणी में रखी गई हैं । ओबीसी के लिए 39 पद आरक्षित रखे गए हैं, जबकि अनुसूचित जाति के लिए 15 और जनजाति के लिए सिर्फ दो पद आरक्षित किए गए हैं (हिंदु्स्तान,दिल्ली,4.10.2010)।

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