ट्राइबल विभाग में कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर किए गए करोड़ों रुपए के घोटाले के तार मंत्रालय से जुड़े होने के संकेत मिल रहे हैं। सरकार की नाक के नीचे बैठे आदिम जाति आयुक्त कार्यालय के आरोपी अफसरों ने सनसनीखेज खुलासे वाली महालेखाकार की रिपोर्ट भी दबा दी है। रिपोर्ट बताती है कि बिलासपुर और जगदलपुर जिलों में ही आधा करोड़ रुपए की बंदरबांट कर ली गई।
आदिवासी बच्चों को कं प्यूटर ट्रेनिंग देने के नाम पर बस्तर, बिलासपुर, धमतरी, राजनांदगांव आदि जिलों में शासकीय राशि का जमकर दुरुपयोग किया गया। महालेखाकार की गंभीर आपत्तियों के बावजूद कंप्यूटर देने वाली संस्था को अफसरों ने लाखों रुपए का मनमाना भुगतान किया।
दैनिक भास्कर में मामले का भंडाफोड़ होने के बाद विभागीय मंत्री केदार कश्यप ने जांच कराने का एलान किया था, लेकिन अब उन्होंने ने भी चुप्पी साध ली है। भास्कर को मिली महालेखाकार की रिपोर्ट के कुछ अंशों में ही दो जिलों में करीब 40 लाख रुपए का घोटाले का उल्लेख है।
योजना के लिए संचालक आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग और मेसर्स एडच्यूकाम सॉल्यूशन प्रा. लि. नई दिल्ली के बीच करार हुआ था। एमओयू के बिंदू 13 के अनुसार निविदा तीन शैक्षणिक सत्रों के लिए वैध थी। सभी जिलों के सहायक आयुक्तों द्वारा इन्हें तीन सत्रों में संचालित कर छह माह का कोर्स पूरा करना था।
पहले सत्र में ही कंप्यूटर ट्रेनिंग संतोषजनक न होने पर कार्यक्रम निरस्त करने का निर्देश था, लेकिन लेखा परीक्षा में इन निर्देशों की खुली अवहेलना होना पाया गया। विभाग के बिलासपुर जिले के नियंत्रण में 136 प्री-मैट्रिक व पोस्ट मैट्रिक हास्टल हैं। उमें से प्रथम सत्र में अनुबंध के अनुसार 50 हास्टलों को 2007-08 में ट्रेनिंग दी गई। अनुबंधों के मुताबिक न तो ट्रेनरों का बायोडाटा जमा नहीं गया। सफल छात्रों को प्रमाणपत्र भी नहीं दिए गए।
अनुबंध के बिंदु नं. 3.1 के प्रावधानों के अनुसार नए सत्र में कंप्यूटर ट्रेनिंग निरस्त कर दी जानी थी। सहायक आयुक्त ने ऐसा न कर 2008-09 में फिर से पूर्व अनुबंधित कोर्स को ही 50 हास्टलों में फिर से पढ़वाया। यही नहीं संबंधित संस्था को 20 लाख 90 हजार रुपए का भुगतान भी कर दिया।
अफसरों ने नियमों की अनदेखी की हदें लांघते हुए 2009-10 में भी उसी कोर्स को उन्हीं 50 हास्टलों में जारी रखा। महालेखाकार ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए कहा कि योजना की राशि तीन सत्रों में एक ही हास्टल में उसी कोर्स को पढ़ाकर बाकी 87 हास्टलों को कंप्यूटर ट्रेनिंग से वंचित रखा।
योजना में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को हटाने की जरूरत भी विभाग ने नहीं समझी। आयुक्त कार्यालय में एक अधिकारी और जगदलपुर में एक अफसर लंबे समय से योजना से जुड़े हैं। जबकि एक आला अफसर जगदलपुर से जा चुके हैं और एक अधिकारी अब मंत्रालय में हैं। बिलासपुर में पदस्थ तत्कालीन अधिकारी के सूरजपुर, कुछ अधिकारी कवर्धा और डौंडी में होने की जानकारी है(जॉन राजेश पॉल,रायप�,दैनिक भास्कर,जगदलपुर/बिलासपुर,4.10.2010)।
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