03 अक्टूबर 2010

झारखंड में ठेके पर चल रहे पॉलीटेक्निक

झारखंड में सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थानों में इंजीनियरिंग डिप्लोमा के महत्वपूर्ण शाखाओं में भी पढ़ाई ठेके पर नियुक्त व्याख्याताओं के माध्यम से हो रही है। वह भी अंशकालीन व्याख्याताओं के भरोसे। इनमें कंप्यूटर इंजीनियरिंग, सूचना तकनीक, माइनिंग इंजीनियरिंग, मैकेनिकल व सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्टि्रकल इंजीनियरिंग जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं भी शामिल हैं। जिस संस्थान में डेढ़ सौ रुपये प्रति कक्षा पढ़ाने वाले बाहर के फैकल्टियों से शिक्षण कार्य कराया जाता हो, वहां शिक्षा की गुणवत्ता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थिति यह है कि प्रदेश के सभी तेरह सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थानों में संचालित डिप्लोमा की पढ़ाई बदहाल है। विभिन्न पॉलीटेक्निक संस्थानों द्वारा प्रत्येक वर्ष अंशकालीन व्याख्याताओं की संविदा पर नियुक्ति की जाती है। नियुक्ति मे यह शर्त निहित होती है कि व्याख्याता के रूप में नियुक्त होनेवाले अभ्यर्थी को प्रति कक्षा डेढ़ सौ रुपये देय होंगे तथा एक माह में कुल राशि किसी भी कीमत पर पांच हजार रुपये से अधिक नहीं होगी। लेकिन इन पदों के लिए अभी तक वैसे अभ्यर्थी ही नियुक्ति होते रहे हैं, जिन्हें कहीं नौकरी नहीं मिली और पूर्णत: बेरोजगार है। इक्का-दुक्का ही सेवानिवृत्त व्याख्याता या इंजीनियर इस काम में लगे हैं। दूसरी तरफ, पॉलीटेक्निक संस्थानों में अधिकांश स्थायी पद रिक्त हैं। कहीं-कहीं तो कुछ शाखाओं में एक भी शिक्षक नहीं हैं। ज्ञात हो कि राज्य सरकार ने 2008 में जमशेदपुर के एक्सएलआरआई से पॉलीटेक्निक संस्थानों की स्थिति का मूल्यांकन कराया था। संस्थान ने मूल्यांकन के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्र-शिक्षक का अनुपात काफी खराब है। इसका बुरा असर पठन-पाठन पर पड़ रहा है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि कई संस्थानों में तो एक स्थायी व कई अंशकालीन व्याख्याताओं से काम चलाया जा रहा है। संस्थानों में न तो विभागाध्यक्ष हैं और न ही वरिष्ठ व्याख्याता, लेकिन राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट को भी गतल खाते में रख दिया। हालांकि कोड़ा सरकार में कुछ पदों पर नियुक्ति हुई। बावजूद स्थिति काफी खराब है(नीरज अम्बष्ठ,दैनिक जागरण,रांची,3.10.2010)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।