यह पहला मौका है जब प्रदेश में एमबीए और एमसीए में हजारों सीटें खाली हैं। एंट्रेंस परीक्षा से लेकर काउंसिलिंग तक समय पर होने के बावजूद यह स्थिति है। पिछले साल तक दूसरे राउंड की काउंसिलिंग तक दोनों कोर्स में 80 फीसदी सीटें भर जाती थीं। इस बार यह आंकड़ा 50 पर भी नहीं पहुंचा है।
मार्केट डिमांड बढ़ने के बावजूद शहर के स्टूडेंट्स एमबीए-एमसीए करने में रुचि नहीं दिखा रहे। सबसे ज्यादा खराब स्थिति एमसीए की है। इस कोर्से की तकरीबन 4500 सीटों में से तीन हजार सीटें खाली हैं। एमबीए की 15 हजार में से आठ हजार सीटों पर कॉलेजों को स्टूडेंट्स का इंतजार है। आईएमएस के लिए भी यह पहली बार है जब कई सीटें खाली पड़ी हैं।
एमसीए में यूनिवर्सिटी के ही स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस और एसजीएसआईटीएस की स्थिति थोड़ी ठीक है बाकी कॉलेजों को काफी कोशिशों के बाद भी स्टूडेंट्स नहीं मिल पा रहे।
दूसरे शहरों में जा रहे हैं
बीई में ज्यादा सीटें होने से परेशानी जगजाहिर है लेकिन एमबीए और एमसीए के सीमित कॉलेज होने के बावजूद स्टूडेंट्स नहीं हैं। इसके पीछे जानकारों के अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। डायरेक्टोरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (डीटीई) के ओएसडी डॉ.लक्ष्मीनारायण रेड्डी बताते हैं कि हायर एजुकेशन में स्टूडेंट्स पुणो और मुंबई ज्यादा पसंद कर रहे हैं। चूंकि प्रदेश और बाहर के कॉलेजों में फीस लगभग समान है इसलिए स्टूडेंट्स अच्छा प्लेटफॉर्म लेने के लिए बड़ी सिटीज चुन रहे हैं।
एआईसीटीई से एमबीए पार्ट टाइम
अभी तक जॉब के साथ एमबीए करने के लिए आईएमएस स्टूडेंट्स की पहली पसंद हुआ करता था लेकिन अब एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त कॉलेजों से भी पार्ट टाइम एमबीए आसानी से किया जा सकता है। एंट्रेंस की पाबंदी नहीं होने से जॉब करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या एमबीए पार्ट टाइम में अगले सालों में बढ़ सकती है।
कॉलेजों को मिली फुल फ्रीडम
डीटीई ने जिस तरह बीई में कॉलेज लेवल काउंसिलिंग कराकर कॉलेजों को संतुष्ट किया है उसी तरह एमबीए और एमसीए के चौथे राउंड में कॉलेज अपनी इच्छानुसार स्टूडेंट्स का एडमिशन कर सकेंगे। 5 अक्टूबर से होने जा रही थर्ड काउंसिलिंग के बाद चौथा राउंड भी होगा जिसमें कॉलेज अपने अनुसार एडमिशन देंगे(गजेंद्र विश्वकर्मा,दैनिक भास्कर,इन्दौर,4.10.2010)।
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