04 अक्टूबर 2010

इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में पीएचडी में हर साल सौ छात्रों को दाखिला

बात आर्थिक मंदी की हो या फिर जनसंख्या विस्तार से अर्थ जगत पर पड़ने वाले प्रभाव की, गुरु गोविंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) अब छात्रों को कम्प्यूटर एप्लीकेशन, बीटेक, एमटेक व एमबीए कराने के साथ-साथ अनुसंधान के लिए भी भरपूर अवसर मुहैया कराएगा।

विश्वविद्यालय की मुहिम के तहत न सिर्फ व्यवसायिक मोर्चे पर अब तक की रिसर्च का संग्रह किया जा रहा है, बल्कि इस बात की पड़ताल भी की जा रही है कि किन विषयों पर भविष्य में रिसर्च सम्भव है। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय की इस पूरी मुहिम में एकत्र की जा रही अधिकतम अनुसंधान सामग्री भारतीय विद्वानों की होगी।

आईपीयू विश्वविद्यालय प्रोफेशनल एजुकेशन के मोर्चे पर अपनी एक अलग पहचान कायम कर चुका है और इसी का नतीजा है कि 18 हजार सीटों के लिए आवेदनों की संख्या एक लाख 70 हजार तक पहुंच रही है। विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों के प्रति बढ़ते इसी रुझान को देखते हुए अब रिसर्च की ओर कदम बढ़ाए गए हैं।

इसके लिए न सिर्फ विभिन्न विभागों में पीएचडी छात्रों का पंजीकरण हो रहा है, बल्कि ऐसे छात्रों की मदद के लिए अपनी तरह का अलग रिसर्च रेफरेंस सेंटर तैयार हो रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से तैयार हो रहे इस सेंटर में प्रोफेशनल रिसर्च के साथ ही कुछ ऐसे टॉपिक भी छात्रों के समक्ष उपलब्ध रहेंगे,जिन पर वे अपनी रुचि के अनुसार काम कर सकते हैं। इतना ही नहीं, विभिन्न विषयों पर देशी-विदेशी विद्वानों की महत्वपूर्ण किताबों को भी इस सेंटर में उपलब्ध कराया जाएगा।

आईपीयू प्रवक्ता नलिनी रंजन ने बताया कि रिसर्च रेफरेंस सेंटर विश्वविद्यालय के द्वारका कैम्पस में निर्माणाधीन चार मंजिला लाइब्रेरी में बनेगा। यहां प्रोफेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में हुई उन रिसर्च को रखा जाएगा, जिनके आधार पर छात्र शोध की राह तलाश सकें।

उन्होंने बताया कि कोशिश यही है कि भारतीयों छात्रों की रिसर्च को ही इस सेंटर में जुटाया जाए, लेकिन विदेशी विद्वानों की ओर से कोई अहम जानकारी उपलब्ध होगी तो उसे भी इस सेंटर का हिस्सा बनाया जाएगा। अगले सत्र से इस सेंटर के शुरू होने की उम्मीद है। लाइब्रेरी पूरी तरह से ऑनलाइन होने के कारण एक ही छत के नीचे अध्ययन व अनुसंधान दोनों ही मोर्चो पर छात्रों को भरपूर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी(दैनिक भास्कर,दिल्ली,4.10.2010)।

दैनिक हिंदुस्तान की ख़बरः

गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय हर साल पीएचडी में सौ लोगों का नामांकन करेगा। शोध को बढ़ावा देने के मक्सद से आई पी ने ऐसा कदम उठाया है। इसके अलावा आईपी विश्वविद्यालय को शोध में छात्रों की सहायता के लिए अपने नए कैंपस में रेफरेंस सेंटर भी खोलेगा और इसके अलावा वहां की लाइब्रेरी, डेलनेट नेटवर्क के अंतर्गत आती है जो कि छात्रों को शोध और पढ़ाई के लिए मददगार साबित होगी। आईपी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो.डी.के .बंदोपध्याय ने कहा कि हमने फैसला किया है कि हम हर बार पीएचडी के लिए सौ छात्रों का नामांकन करेंगे। बंदोपध्याय ने बताया कि पीएचडी के लिए वर्ष में दो बार लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाएगा और उसके बाद इंटरव्यू के आधार पर छात्रों का चयन किया जाएगा। पिछले वर्ष तक आई पी में 25 छात्रों का नामांकन हुआ करता था लेकिन इस बार 106 छात्रों का नामांकन हुआ है । साल में दो बार परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। बंदोपध्याय ने बताया कि आई पी विवि में कु ल 250 स्लॉट है यानी 250 छात्रों को पीएचडी के लिए गाइड मिल सकता है । उनका कहना था कि पीएचडी कराने का मकसद ये है कि ज्यादा गुणवत्ता वाले छात्र सामने आएं। छात्रों को बतौर स्कॉलरशिप पहले वर्ष 12000 अगले दो वर्ष तक 14000 दिया जाएगा। इसके अलावा कंसोलिडेट स्कॉलरशिप का भी प्रावधान है जिसके तहत 5000 रुपए प्रदान किए जाएंगे। बंदोपध्याय ने कहा कि पीएचडी करने की अधिकतम समय-सीमा छह वर्ष की होगी और कोई भी कामकाजी प्रोफेशनल पीएचडी के लिए नामांकन करा सकता है । आईटी, मैनेजमेंट , बायोटेक्नोलॉजी आदि क्षेत्रों में पीएचडी क राई जाएगी। वहीं द्वारका कैं पस स्थित आई पी की नई लाइब्रेरी में शोधार्थियों के लिए काफी इंतजाम किए गए हैं । बंदोपध्याय ने कहा कि हमारा जोर है कि छात्रों को रिफरेंस बुक मिलने में दिक्कत न आए और देशी भाषा में भी केस स्टडी अधिक से अधिक उपलब्ध हो।

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