दुकानों और छोटे होटलों में नौकरी करने वाले हर कर्मचारी को अब सेवानिवृति के बाद पेंशन मिलेगी। अभी तक सिर्फ केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों को ही पेंशन मिलती है। असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार स्वाबलंबन बीमा योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना में 18 से 55 वर्ष तक की उम्र के ऐसे कर्मचारी शामिल होंगे, जो किसी भी प्रकार की भविष्यगत पेंशन योजना में नहीं आते हैं।
यह योजना वैसे कर्मचारियों के लिए कारगर साबित होगी, जो उम्र की ढलान पर नौकरी से हटने के बाद आर्थिक तंगी से जूझते हैं। इनमें दुकानों पर काम करनेवाले कर्मचारियों से लेकर छोटी फैक्ट्रियों, कारखानों और ग्रामीण कुटीर उद्योगों में कार्यरत हैं। इसके लिए कर्मचारियों को हर माह न्यूनतम 100 रुपए तक किश्त देने की सुविधा रहेगी। यह स्कीम स्वाबलंबी बीमा योजना के नाम से जीवन बीमा निगम के सहयोग से शुरु हो रही है।
देश में 87 प्रतिशत कर्मचारी असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं, जिन्हे पेंशन नहीं मिलती। इस योजना के तहत 100 से 1000 रुपए प्रति माह जमा करने पर 60 साल की उम्र के बाद पेंशन पाने के अधिकारी हो जाएंगे और उनके अंशदान के मुताबिक उन्हें सेवानिवृति के बाद पेंशन मिलने लगेगी। सरकार ने मार्च में पेश बजट में ही इसके लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान कर दिया था, ताकि सबके लिए पेंशन का इंतजाम हो सके, खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृति के बाद भी अधिक से अधिक आत्मनिर्भरता रहे। ऐसे कर्मचारी जिनका न तो पीएफ कटता है और न ही ईपीएफ, ठेके पर रखे गए कर्मचारी भी इस सुविधा से वंचित रहते हैं। पेंशन पाने के लिए सरकार ने कुछ नियम और प्रावधान भी बनाए हैं। शर्त यही है कि कोई भी कर्मचारी साल भर में अधिक से अधिक 12 हजार रुपए ही जमा कर सकता है। सरकार भी इसमें एक हजार रुपए का अंशदान करेगी।
खास बात यह है कि 60 वर्ष की उम्र होने पर कर्मचारी को कुल जमा राशि पर बोनस आदि मिलाकर 60 प्रतिशत राशि एकमुश्त मिलेगी। शेष राशि का भुगतान हर माह अथवा साल में एक बार जीवन पर्यन्त मिलता रहेगा। आज देश में करीब आठ करोड़ लोग ऐसे हैं जो साठ साल की उम्र पार कर चुके हैं और सेवानिवृति के बाद आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। अब जो हर माह 100 रुपए कम से कम जमा कराएगा अपना जीवन सुरक्षित करा सकेगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए राज्य सरकारों से भी सुझाव मांगे थे लेकिन कर्नाटक और हरियाणा को छोड़ किसी भी राज्य ने अभी तक इसमें रुचि नहीं ली(दैनिक भास्कर,रांची,3.10.2010)।
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