कई देशों के खिलाड़ी भले दिक्कतों से जूझ रहे राष्ट्रमंडल खेल की तैयारियों को लेकर नाखुशी जता रहे हों, लेकिन भारतीय आईटी सेक्टर के कर्मचारियों के लिए यह वक्त खुशी मनाने का है। कंपनियां अगले दो महीने में मिड टर्म इंक्रीमेंट, प्रमोशन और वेरिएबल पे का बड़ा हिस्सा देने की तैयारी कर रही हैं। वती कंसल्टिंग के सीईओ अमिताभ दास ने कहा, 'बीते कुछ महीने के दौरान हालात काफी बदल गए हैं। लगभग हर सेक्टर नियुक्तियां कर रहा है। ऐसे में, आईटी कंपनियों के लिए टैलेंट को बनाए रखने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। खास तौर से ऐसे लोगों को, जो किसी खास सेगमेंट में विशेषज्ञता रखते हैं। तनख्वाह में बढ़ोतरी, प्रमोशन और वेरिएबल पेआउट जैसे उपाय करने के बाद साल 2010 के अंत में हालात बेहतर हो सकते हैं।'
टैलेंट बनाए रखने और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी कंपनियां कर्मचारियों को आकर्षक वेरिएबल पेआउट, प्रमोशन या तनख्वाह में ठीकठाक इजाफा देने की योजना बना रही हैं। देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक इंफोसिस अक्टूबर में अपने पूरे स्टाफ को प्रमोशन देने की तैयारी में है। जिन लोगों का प्रमोशन होगा, उन्हें उसी के मुताबिक वेतन बढ़ोतरी भी की जाएगी।फरवरी में अपने कर्मचारियों को वेतन में 9 फीसदी औसत इजाफा देने वाली विप्रो अगले कुछ महीने में एक बार फिर इंक्रीमेंट दे सकती है। विप्रो के ज्वाइंट सीईओ (आईटी बिजनेस) सुरेश वासवानी ने कहा, 'ऐसा नहीं है कि हम मिड-टर्म इंक्रीमेंट पर गौर नहीं करेंगे। ऐसा नहीं है कि हम केवल साइकिल के हिसाब से चलेंगे, क्योंकि बाजार में हालात बदलते हैं, ग्राहकों से जुड़ी स्थिति बदलती है।'
तनख्वाह बढ़ाने के साथ-साथ कंपनी ने इस साल की शुरुआत में 20,000 प्रमोशन भी दिए थे। हालांकि, कई आईटी कंपनियों ने साल की पहली छमाही में इंक्रीमेंट और प्रमोशन का एलान किया था, लेकिन इसके बावजूद कंपनी छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों की तादाद चिंता का विषय बनी हुई है। वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान इसमें कुछ कमी आई थी, लेकिन इस साल की शुरुआत से इसमें एक बार फिर गति आई है। कुछ कंपनियों के मामले में नौकरी छोड़ने की दर 25 फीसदी पहुंच गई है। साल 2004-05 के बूम के दौरान भारतीय आईटी कंपनियां 40 फीसदी तक एट्रिशन रेट का सामना कर रही थीं। इससे निपटने के लिए कंपनियां वेतन में बढि़या इजाफा कर स्टाफ को बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
उदाहरण के लिए इंफोसिस ने वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान पिछले साल अप्रैल में स्टाफ का वेतन नहीं बढ़ाया था, लेकिन 2009 अक्टूबर में और इस साल अप्रैल में इंक्रीमेंट का एलान किया गया। उसने अप्रैल में करीब 5,400 कर्मचारियों को प्रमोशन भी दिया था। जूनियर से मिड-लेवल तक के कर्मचारियों की तनख्वाह 13 से 17 फीसदी के बीच बढ़ी थी, जबकि सीनियर मैनेजमेंट का इंक्रीमेंट औसतन 10 फीसदी रहा था। इंफोसिस में ह्यूमन रिसोर्सेज प्रमुख नंदिता गुर्जर ने कहा, 'हमारी मंशा कर्मचारियों को बनाए रखने की है। हम बाजार के मानकों के हिसाब से मेहनताना देकर ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं।' इंफोसिस जहां प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों को इंक्रीमेंट देकर अपने साथ जोड़े रखने की कोशिश कर रही है, वहीं टीसीएस ज्यादा वेरिएबल पे देने की तैयारी कर रही है।
विप्रो की रणनीति भी कुछ इसी तरह की है। देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज निर्यातक ने अपने स्टाफ को आश्वस्त किया है कि उन्हें इस साल हर तिमाही में 100 फीसदी वेरिएबल पे मिलेगा। दुर्भाग्य से यह बहार आईटी सेक्टर तक ही सीमित रह सकती है क्योंकि एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल और ऑटो सेक्टर वेतन बढ़ोतरी के एक और दौर में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे(महिमा पुरी,इकनॉमिक टाइम्स,दिल्ली,29.9.2010)।
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